अशोक वर्मा
माउंट आबू राजस्थान : ब्रह्माकुमारी के मुख्य कार्यक्रम बाबा मिलन के अंतिम टर्न में नॉर्थ ईस्टर्न जोन से पधारे 22000 भाई बहनों को संबोधित करते हुए संस्था के वरिष्ठ राज्योगी बी के रामनाथ भाई ने स्वभाव संस्कार परिवर्तन कैसे करें विषय पर क्लास कराते हुए कहा कि योग और सत्संग से वृत्ति बदलती है, ज्ञान से वृत्ति नहीं बदलती। स्थान का वाइब्रेशन संस्कार परिवर्तन मे सहयोगी बनता है ।उन्होंने कहा कि अपने लक्ष्य को कभी नहीं भूलना चाहिए, प्रथम स्मृति रखो कि मैं कौन? उन्होंने अंतर्मुखता वाह्य मुखता आदि पर विस्तार से प्रकाश डाला ।उन्होंने उसके सूक्ष्म पहलुओं पर भाई बहनों को बारीकी से समझाया।पुरूषार्थ वृद्धि पर उन्होंने एक नई तकनीक बताई ।कहा कि मुरली के किसी एक शब्द को निकाल लो जो तुम्हें अच्छा लगे ,उसे लिख करके रख लो।उसे बार-बार पढ़ो फिर उसको धारण करो। मन में कुछ भी अगर व्यर्थ आएगा तो बुद्धि उसे रोकेगी लेकिन मुरली की उस पंक्ति का मंथन होना चाहिए। गलत कुछ भी स्वीकार नहीं करे। मुरली की वह पंक्ति बूरे स्वप्न को भी आने नही देगी। उन्होंने कहा कि देह मानने से बहुत से व्यर्थ आएंगे लेकिन अपने को आत्मा समझने से व्यर्थ नहीं आएगा। बीज को अग्नि के डालने से खत्म होगा ।अग्नि में डालने से वह दोबारा नहीं उगेगा। योग व्यर्थ को भस्म कर देता है। योग जागृति विधि पर उन्होंने कहा मैं कौन?इसपर लगातार मंथन करना होगा फिर निश्चय होगा।यह रूहानी सत्संग है यहा आने वालो को आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। उन्होंने प्रवचन के अंत में 3 मिनट का योग का अभ्यास कराया।
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