मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के स्नातकोत्तर समाजशास्त्र विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

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गया जी। मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के स्नातकोत्तर समाजशास्त्र विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का आयोजन कुलपति प्रो. एस.पी. शाही की अध्यक्षता में किया गया है। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एड्यूकेशनल प्लैनिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन’ (NIPEA), नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित एवं वित्त पोषित किया गया है।

संगोष्ठी का औपचारिक उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर दीपक कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत किया एवं संगोष्ठी की आयोजन सचिव डॉ0 चांदनी रोशन ने विषय से परिचित कराया है।

आज इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता (Keynote Speaker) डायरेक्टर, प्लैनिंग एंड डेवलपमेंट, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एड्यूकेशनल प्लैनिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (NIEPA), नई दिल्ली के प्रोफेसर कुमार सुरेश और विशिष्ट वक्ता के रूप में सामाजिक विकास परिषद, (CSD) नई दिल्ली के पूर्व निदेशक एवं प्रोफेसर अशोक पंकज
मौजूद रहे हैं।

अपने वक्तव्य के दौरान मुख्य वक्ता प्रो. कुमार सुरेश ने कहा कि बिहार में उनकी संस्था द्वारा वित्त पोषित पहली बार किसी दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इसका मुख्य विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को धरातल पर लागू करने में आ रही कठिनाइयों एवं इसके समाधानों पर अकादमिक विमर्श करना है।

संगोष्ठी के दूसरे सत्र में पूर्णाधिवेशन सत्र का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रोफेसर बीरेंद्र कुमार सिंह, बी आर ए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर ने किया है। इसमें जामिया मीलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की प्रो मनीषा त्रिपाठी पाण्डेय एवं दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया जी के प्रो प्रवीण कुमार ने विषय पर अपने शोध-पत्रों के माध्यम से गहन विचार विमर्श प्रस्तुत किया है।

इस अवसर पर मगध विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अध्यक्ष प्रोफेसर प्रमोद कुमार चौधरी एवं मानविकी संकाय की संकायाध्यक्ष प्रोफेसर निभा सिंह भी मंच पर उपस्थित रही है।धन्यवाद ज्ञापन डॉ किशोर कुमार एवं राहुल सिंह एवं मंच का संचालन डॉ अनन्या स्वराज ने किया है। इस अवसर पर विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, प्रो मुकेश कुमार, डॉ प्रियम शर्मा, डॉ वंदना कुमारी, डॉ कविता कुमारी, डॉ अनन्या स्वराज, राहुल सिंह, डॉ प्रीति चंदन, डॉ कुमारी रती, डॉ रघुवंश सिन्हा एवं अन्य विभागों के शिक्षक, शोधार्थी कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे हैं।

मुख्य वक्ता प्रोफेसर कुमार सुरेश ने अपने वक्तव्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संबंध में की चुनौतियों के संबंध में कहा की प्रारंभिक दौर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लेकर काफी संशय की स्थिति थी लेकिन वर्तमान में शिक्षा जगत से जुड़े लोग इसे जानने और समझने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं । उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य भारतीय शिक्षा व्यवस्था को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के समक्ष लाना है।

वहीं विशिष्ट वक्ता प्रो अशोक पंकज ने बिहार के छात्रों का शिक्षा के लिए अन्य राज्यों में प्रवास के संबंध में कहा कि जब तक हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को गंभीरता से लेते हुए इसे लागू करने में स्थानीय चुनौतियों को हल नहीं करेंगे तब तक हम बिहार के शिक्षा व्यवस्था में मूलभूत सुधार नहीं ला पाएंगे।

दूसरे सत्र में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय नई दिल्ली की प्रोफेसर मनीष त्रिपाठी पांडे ने अपने वक्तव्य के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के साथ आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए इसकी संरचनात्मक चुनौतियां, असमानता, अधिगम संबंधी समस्या, डिजिटल समावेशन, डिजिटल साक्षरता, भाषा की विविधता आदि समस्याओं को रेखांकित किया है।

वहीं दूसरे वक्ता दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय गया जी के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर प्रवीण कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को राजनीतिशास्त्रीय दृष्टिकोण से समझने पर जोर दिया है। उन्होंने अपना उद्बोधन ने कहा कि कई बार सरकारे विशेष नीतियां विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाती हैं उसमें उनका भी राजनीतिक स्वार्थ निहित होता है इसलिए हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लेकर हमारे पूर्व अवधारणाओं को पर ध्यान में रखते हुए उसके तार्किक क्रियान्वयन पर जोर देना होगा।

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