चैती छठ के अर्घ्य के दौरान काल बनी नदियां पटना, आरा और मनेर में डूबने से 10 से ज्यादा लोगों की मौत

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आस्था के महापर्व चैती छठ के समापन पर बिहार के अलग-अलग जिलों से दिल दहला देने वाली खबरें सामने आ रही हैं। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान गंगा और अन्य जलाशयों में स्नान करते समय 10 से अधिक लोगों की डूबने से मौत हो गई। पटना, आरा (भोजपुर) और मनेर जैसे इलाकों में खुशियां मातम में बदल गईं। प्रशासन की तमाम तैयारियों और घाटों पर तैनात एसडीआरएफ (SDRF) की मौजूदगी के बावजूद ये दर्दनाक हादसे हुए, जिससे मृतकों के परिजनों में हाहाकार मचा हुआ है।

पटना और मनेर में बेकाबू हुई स्थिति राजधानी पटना से सटे मनेर और दानापुर के घाटों पर अर्घ्य के दौरान भारी भीड़ उमड़ी थी। मनेर के बलुआ घाट पर गहरे पानी में जाने के कारण तीन युवकों की डूबने से जान चली गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक नहाने के दौरान अचानक पैर फिसलने से गहरे खड्ड में चले गए। वहीं, पटना के अन्य घाटों पर भी डूबने की छिटपुट घटनाएं सामने आई हैं। स्थानीय गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला, जिन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

आरा (भोजपुर) में एक ही परिवार के दो चिराग बुझे भोजपुर जिले के आरा में भी स्थिति अत्यंत हृदयविदारक रही। यहाँ के अलग-अलग घाटों पर अर्घ्य के दौरान चार लोगों की डूबने से मौत की पुष्टि हुई है। बताया जा रहा है कि इनमें से दो सगे भाई थे, जो सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पवित्र स्नान कर रहे थे। एक को डूबता देख दूसरे ने बचाने की कोशिश की, लेकिन लहरों के तेज बहाव में दोनों ही समा गए। घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और त्योहार की रौनक आंसुओं में तब्दील हो गई है।

प्रशासनिक मुस्तैदी पर उठे सवाल चैती छठ को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता दावों के साथ घाटों पर बैरिकेडिंग और एसडीआरएफ की तैनाती की थी। लेकिन कई जगहों पर श्रद्धालुओं ने बैरिकेडिंग पार कर गहरे पानी में जाने की कोशिश की, जो जानलेवा साबित हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ घाटों पर गोताखोरों की कमी थी और समय पर मदद नहीं मिल सकी। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर में अचानक उतार-चढ़ाव और गहरे गड्ढों की वजह से ये हादसे हुए।

मृतकों के परिजनों को मुआवजे का आश्वासन बिहार सरकार ने इन हादसों पर गहरा दुख व्यक्त किया है। संबंधित जिलाधिकारियों (DM) ने मृतकों के परिजनों को आपदा राहत कोष से 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी संदेश में लोगों से अपील की गई है कि वे जलाशयों के किनारे सावधानी बरतें और केवल चिह्नित घाटों पर ही स्नान करें। फिलहाल, सभी प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य पूरा कर लिया गया है और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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