इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को एक बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है। नाबालिगों के यौन शोषण (POCSO Act) के आरोपों में घिरे शंकराचार्य की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उनकी तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने इस मामले में अंतरिम सुरक्षा प्रदान करते हुए स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक पुलिस उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी।
“आरोप निराधार और राजनीति से प्रेरित” – बचाव पक्ष की दलील
अदालत में शंकराचार्य के वकीलों ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर (FIR) पूरी तरह से मनगढ़ंत और उन्हें बदनाम करने की एक गहरी साजिश है। वकीलों ने अदालत को बताया कि जिन बच्चों के शोषण का आरोप लगाया गया है, वे कभी आश्रम में रहे ही नहीं। बचाव पक्ष ने इसे ‘पॉलिटिकल वेंडेटा’ (राजनीतिक द्वेष) करार देते हुए कहा कि शंकराचार्य की निष्पक्ष आवाज को दबाने के लिए इस तरह के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
प्रयागराज POCSO कोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुई थी FIR
विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने झूंसी थाना पुलिस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
आरोप: आशुतोष ब्रह्मचारी नामक व्यक्ति द्वारा दायर शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 2025 के माघ मेले और महाकुंभ के दौरान आश्रम में ‘बटुकों’ (छात्रों) का यौन शोषण किया गया।
धाराएं: पुलिस ने इनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
“सत्य की जीत होगी” – शंकराचार्य का बयान
हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी प्रतिक्रिया में न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने वाराणसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा:
“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। जिन्हें लगता है कि वे झूठे आरोपों से हमारी संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचा सकते हैं, वे भ्रम में हैं। मैं जाँच में पूर्ण सहयोग करने के लिए तैयार हूँ और यदि आवश्यकता पड़ी तो सत्य सिद्ध करने के लिए नार्को टेस्ट (Narco Test) कराने को भी तैयार हूँ।”
कोर्ट का निर्देश: जाँच में करें सहयोग
अदालत ने शंकराचार्य को राहत तो दी है, लेकिन साथ ही कुछ शर्तें भी रखी हैं। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य पुलिस की जाँच में पूरी तरह से सहयोग करेंगे और बिना अनुमति देश छोड़कर नहीं जाएंगे। सरकार की ओर से पेश हुए वकीलों ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए थे, लेकिन कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता और संस्था की गरिमा को देखते हुए फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक लगाना उचित समझा।
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