अनूप नारायण सिंह।
निसंतानता आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली और बदलते सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश में एक आम लेकिन चुनौतीपूर्ण समस्या बन गई है। बहुत से दंपति वर्षों तक संतान सुख से वंचित रहते हैं और महंगे इलाज जैसे कि आईवीएफ (IVF) का सहारा लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। परंतु, अब एक नई आशा की किरण सामने आई है – फर्टिलिटी एनहांसिंग लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, जिसे आमतौर पर दूरबीन सर्जरी कहा जाता है।
दूरबीन सर्जरी: सरल, सटीक और प्रभावी
दूरबीन सर्जरी एक अत्याधुनिक तकनीक है जिसमें छोटे चीरे के माध्यम से पेट के भीतर की समस्याओं का निदान और उपचार किया जाता है। इस प्रक्रिया में एक विशेष कैमरा और उपकरणों की मदद से डॉक्टर्स सीधे गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशयों का निरीक्षण और आवश्यक उपचार करते हैं।
इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह सर्जरी एक ही सेटिंग में हो जाती है — यानी मरीज को बार-बार अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं होती। यह प्रक्रिया कई बार आईवीएफ जैसे महंगे और बार-बार किए जाने वाले इलाज की आवश्यकता को भी खत्म कर देती है।
प्राकृतिक गर्भधारण को बढ़ावा
फर्टिलिटी एनहांसिंग सर्जरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह महिला के प्रजनन तंत्र को प्राकृतिक रूप से कार्य करने लायक बनाती है, जिससे बिना किसी कृत्रिम तकनीक के गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। इससे न केवल पहली बार, बल्कि आगे भी दोबारा या तिवारा गर्भधारण संभव होता है।
आईवीएफ का सस्ता और प्रभावी विकल्प
जहां आईवीएफ का खर्च लाखों में हो सकता है, वहीं दूरबीन सर्जरी अपेक्षाकृत बहुत कम खर्च में की जा सकती है। यही कारण है कि यह तकनीक आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी बेहद लाभकारी साबित हो रही है।
बिहार में नई उम्मीद: डॉ. संजीव कुमार और डॉ. कुमारी अनुराग
पटना वूमेन’स हॉस्पिटल एंड फर्टिलिटी रिसर्च सेंटर के डॉ. संजीव कुमार और डॉ. कुमारी अनुराग ने इस क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह अत्यंत सराहनीय है। इन्होंने अब तक हजारों निसंतान दंपतियों को संतान सुख का आशीर्वाद दिलाया है। इनकी विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों के प्रति समर्पण ने बिहार को इस क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई है।
निष्कर्ष
फर्टिलिटी एनहांसिंग लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, निसंतानता के इलाज में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई है। यह न सिर्फ अधिक सफल है, बल्कि प्राकृतिक, सुरक्षित और सस्ती भी है। डॉ. संजीव कुमार और डॉ. कुमारी अनुराग जैसे विशेषज्ञों की उपस्थिति ने बिहार के दंपतियों के लिए आशा की नई राह खोल दी है। यह तकनीक न केवल चिकित्सा विज्ञान की प्रगति का प्रतीक है, बल्कि उन दंपतियों की मुस्कान भी है, जिन्होंने संतान की आशा लगभग छोड़ दी थी।
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