- समस्त मानव का हित रामचरितमानस में निहित-डॉ० सीताराम झा
अशोक वर्मा
मोतिहारी : मुंशी सिंह महाविद्यालय के संस्कृत एवं हिन्दी विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में “रामचरितमानस में वर्णित मूल्यों की वर्तमान में उपादेयता” विषय एक पर दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान के प्रारम्भ मे अपने स्वागत भाषण में हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ० मृगेन्द्र कुमार ने रामचरितमानस में वर्णित राजधर्म पर प्रकाश डाला।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अरुण कुमार ने विषय प्रवर्तन करते हुए् कहा रामचरितमानस को कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता एवं राजनैतिक लाभ के लिए इस की गलत व्याख्या प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस ने भारतीय संस्कृति तथा सनातन धर्म की रक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्राचार्य ने सभी विद्यार्थियों से ये आग्रह किया कि वे प्रतिदिन कम से कम रामचरितमानस की 10 चौपाई का पाठ करें।
इस व्याख्यान में वक्ता के रूप में लेखक एवं कवि डॉ० सीताराम झा ने अपने उद्बोधन में सर्वप्रथम रामचरितमानस के नामकरण की सार्थकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए । उन्होंने पारिवारिक मूल्य, सामाजिक मूल्य , भरत का भ्रातृभाव को कई सन्दर्भों के माध्यम से प्रकाशित किया। डॉ० झा ने राम-शबरी संवाद, राम-जटायु संवाद के माध्यम से इस बात का जोरदार खण्डन किया कि मानस दलित विरोधी ग्रन्थ है। उन्होने कहा कि तुलसीदास ने समस्त मानवीय संवेदना को अपने काव्य में स्थान दिया है। अतः समस्त मानव का हित इस ग्रन्थ में समाहित है तथा रामचरितमानस इस कार्यक्रम में इतिहास के विभागाध्यक्ष डॉ० प्रभाकर सिंह, राजनीति-शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ० अमित कुमार अर्थशास्त्र डॉ० अमरजीत चौबे वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ० सलाउद्दीन ,डॉ० काशिद अनवर, डॉ सजीव कुमार डॉ० प्रीति आदि अध्यापकों एवं भारी संख्या में छात्रों की उपस्थिति रही। धन्यवाद ज्ञापन हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ० गौरव भारती तथा संचालन कार्यक्रम के सह संयोजक संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ० मनीष कुमार झा ने किया।
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