जिला अस्पताल की दौड़ थमी, मीनापुर सीएचसी में शुरू हुआ सी-सेक्शन

Live News 24x7
3 Min Read
  • बेहोशी के डॉक्टर की तैनाती से खुली राह, अब जटिल प्रसव के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे जिला अस्पताल के चक्कर
​मुजफ्फरपुर। ग्रामीण अंचल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान बनाने की दिशा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मीनापुर ने एक मजबूत और व्यावहारिक नवाचार की शुरुआत की है। अमूमन जिला अस्पतालों तक सीमित रहने वाली सिजेरियन प्रसव की सुविधा को ब्लॉक स्तर पर धरातल पर उतारना सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक नया और प्रभावी प्रयोग साबित हो रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण की इस पहल के तहत मीनापुर सीएचसी में निश्चेतक (एनेस्थेटिस्ट) की विशेष तैनाती कर ऑपरेशन थिएटर को पूरी तरह क्रियाशील बना दिया गया है, जिससे आपात स्थिति में महिलाओं को तत्काल स्थानीय स्तर पर ही शल्य चिकित्सा का सुरक्षा कवच मिलने लगा है।
​रेफरल परंपरा को तोड़कर मौके पर समाधान देने का व्यावहारिक तरीका:
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से जटिल प्रसव मामलों को सीधे जिला अस्पताल रेफर करने की पुरानी परिपाटी पर यह पहल सकारात्मक चोट करती है। ग्रामीण इलाकों में प्रसव पीड़ा के दौरान जिला मुख्यालय जाने में लगने वाला समय कई बार जच्चा और बच्चा दोनों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर देता था। इस भौगोलिक और ढांचागत दूरी को पाटने के लिए ब्लॉक स्तर पर ही आवश्यक विशेषज्ञता उपलब्ध कराना व्यवस्था की सोच में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है, जिससे रेफरल के बोझ में कमी आने के साथ-साथ ‘गोल्डन आवर’ में चिकित्सकीय हस्तक्षेप संभव हो सका है।
​मानव संसाधन प्रबंधन का सफल प्रयोग बनी निश्चेतक की मौजूदगी:
प्रखंड स्तर के अस्पतालों में अक्सर बुनियादी ढांचे के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते आधुनिक सुविधाएं बंद पड़ी रह जाती थीं। मीनापुर में निश्चेतक विशेषज्ञ की सुनिश्चित मौजूदगी ने इस तकनीकी गतिरोध को दूर कर यह साबित किया है कि सही मानव संसाधन प्रबंधन से प्राथमिक तंत्र को भी अत्यधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। शल्य चिकित्सा दल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की भागीदारी ने न केवल सुरक्षित प्रसव का भरोसा दिया है, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों के पेशेवर आत्मविश्वास को भी नई मजबूती दी है।
​सतत निगरानी और अन्य केंद्रों के लिए अनुकरणीय मॉडल
मीनापुर सीएचसी में अपनाई गई यह कार्ययोजना अन्य प्रखंडों के लिए एक अनुकरणीय प्रारूप के रूप में उभर रही है। यदि इसी नवाचारी दृष्टिकोण के साथ विशेषज्ञ टीम, ब्लड लिंकेज और नवजात शिशु देखभाल की कड़ियों को निरंतर मजबूत रखा जाए, तो यह प्रयोग भविष्य में ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली को आत्मनिर्भर बनाने और मातृ मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने में मील का पत्थर साबित होगा।
14
Share This Article
Leave a review

Leave a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *