बिहार में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब एक सरकारी इंजीनियर की अवैध संपत्तियों की जांच के लिए दुनिया की सबसे बड़ी जांच एजेंसी इंटरपोल को मैदान में उतरना पड़ा है। बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने नेपाल में निवेश की गई काली कमाई का पता लगाने के लिए इंटरपोल से आधिकारिक मदद मांगी है। यह कदम भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि अब सरहद पार भी उनकी दौलत सुरक्षित नहीं है।
नेपाल कनेक्शन: आलीशान होटल और जमीन का खेल
EOU की जांच में सामने आया है कि इस दागी इंजीनियर ने बिहार में बैठकर जो कमीशनखोरी की, उसका एक बड़ा हिस्सा पड़ोसी देश नेपाल में खपाया गया है।
काठमांडू में निवेश: सूत्रों के मुताबिक, इंजीनियर ने काठमांडू और पोखरा जैसे प्रमुख शहरों में आलीशान होटल और कई एकड़ जमीन अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी है।
शेल कंपनियां: काली कमाई को सफेद करने के लिए नेपाल में कई ‘शेल कंपनियां’ बनाने का भी शक है, जिनके जरिए पैसे का लेन-देन किया गया।
इंटरपोल की एंट्री क्यों?
चूँकि मामला दूसरे देश की सीमा से जुड़ा है, इसलिए बिहार पुलिस के अधिकार क्षेत्र की अपनी सीमाएं हैं। इसी बाधा को दूर करने के लिए:
एलर्ट नोटिस: EOU ने इंटरपोल के जरिए संबंधित देश को ‘सूचना साझाकरण’ के लिए पत्र लिखा है।
प्रॉपर्टी फ्रीज: अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की मदद से नेपाल स्थित इन संपत्तियों के दस्तावेज जुटाए जाएंगे और उन्हें ‘फ्रीज’ करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
ब्लैक मनी ट्रेल: विदेशी बैंकों में जमा राशि और हवाला के जरिए भेजे गए पैसों का मिलान किया जाएगा।
EOU की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
EOU के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है। बिहार के कई अन्य ‘सफेदपोश’ और इंजीनियर रडार पर हैं जिन्होंने विदेशों में निवेश किया है।
भ्रष्टाचार की कमाई चाहे जमीन के नीचे हो या सीमा के पार, हम उसे ढूंढ निकालेंगे। इंटरपोल के साथ समन्वय से जांच में तेजी आएगी और आरोपी को बचने का कोई रास्ता नहीं मिलेगा।”
क्या होगा अगला कदम?
इंटरपोल से जानकारी मिलते ही EOU आरोपी इंजीनियर के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करेगी। साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी इस मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल किया जा सकता है, जिससे आरोपी की मुश्किलें और बढ़ना तय है।
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