धमाकों से दहला दुनिया का सबसे बड़ा गैस प्लांट, भारत की 47% सप्लाई पर संकट 5 साल तक नहीं सुधरेंगे हालात

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया समेत भारत की भी चिंता बढ़ा दी है। कतर के ‘रास लफान’ (Ras Laffan) औद्योगिक शहर पर हुए भीषण मिसाइल हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है। ईरान और इजरायल के बीच जारी टकराव का सीधा असर अब गैस की कीमतों और सप्लाई पर पड़ने लगा है।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में इजरायल ने दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक ईरान के ‘साउथ पार्स’ (South Pars) पर हमला किया था। इस हमले के जवाब में ईरान ने कतर स्थित ‘रास लफान’ पर मिसाइलें दाग दीं। बता दें कि रास लफान दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) कॉम्प्लेक्स है।

5 साल का लंबा इंतजार और $20 बिलियन का नुकसान

कतर की सरकारी कंपनी ‘कतरएनर्जी’ (QatarEnergy) के प्रमुख साद शरिदा अल काबी ने पुष्टि की है कि इस हमले में प्लांट को ‘व्यापक नुकसान’ पहुँचा है। उन्होंने बताया कि:

कतर की एलएनजी एक्सपोर्ट क्षमता में 17% की भारी गिरावट आई है।

इस हमले से सालाना लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस नुकसान की भरपाई और रिपेयरिंग में करीब 3 से 5 साल का समय लग सकता है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी टेंशन?

भारत अपनी जरूरत की लगभग 47% एलएनजी (LNG) अकेले कतर से आयात करता है। साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने कुल 27.8 मिलियन मीट्रिक टन गैस मंगवाई, जिसमें से 11.30 मिलियन मीट्रिक टन कतर से आई थी। अब कतर में उत्पादन बाधित होने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लगभग बंद होने से भारत में न केवल गैस की कमी हो सकती है, बल्कि घरेलू बाजार में सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की कीमतें भी आसमान छू सकती हैं।

वैश्विक स्तर पर मचेगा हाहाकार

कतर ने साफ कर दिया है कि वह चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम जैसे देशों के साथ किए गए दीर्घकालिक अनुबंधों (Long-term contracts) पर ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) लागू कर सकता है। इसका मतलब है कि आपात स्थिति के कारण कतर अब इन देशों को गैस की गारंटीड सप्लाई नहीं दे पाएगा।

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