मिडिल ईस्ट में तनाव अब अपने चरम पर पहुँच गया है। दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक धमनी, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान के बढ़ते नियंत्रण और नाकाबंदी की धमकियों के बीच अमेरिका ने एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने का फैसला किया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंटागन ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को दोगुना कर दिया है ताकि वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई चेन को टूटने से बचाया जा सके।
हॉर्मुज की खाड़ी: क्यों यहाँ भिड़े हैं दो महाबली?
हॉर्मुज की खाड़ी दुनिया का वो संकरा रास्ता है जहाँ से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20% से 30% व्यापार होता है। ईरान ने हाल के दिनों में इस रास्ते को बंद करने और विदेशी जहाजों को जब्त करने की चेतावनी दी थी।
अमेरिका का सैन्य दबाव: अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट करियर और मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स को स्ट्रैटजिक पॉइंट्स पर तैनात कर दिया है।
ईरान की जवाबी घेराबंदी: ईरान ने भी अपनी ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) को हाई अलर्ट पर रखते हुए तटीय इलाकों में एंटी-शिप मिसाइलें तैनात कर दी हैं।
पेंटागन का ‘प्लान बी’: युद्ध या शांति?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पर वैश्विक शक्तियों और अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को बचाने का भारी दबाव है।
सप्लाई चेन की सुरक्षा: यदि हॉर्मुज बंद होता है, तो पूरी दुनिया में ईंधन की कमी हो जाएगी, जिससे महंगाई बेकाबू हो सकती है।
सहयोगी देशों का साथ: अमेरिका इस सैन्य पुश में ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य खाड़ी देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है ताकि एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाई जा सके।
ईरान का अडिग रुख: ईरान का कहना है कि जब तक उस पर लगे प्रतिबंध नहीं हटते और इजरायल-ईरान तनाव कम नहीं होता, वह खाड़ी में अपनी सक्रियता कम नहीं करेगा।
भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है।
कच्चे तेल की कीमतें: इस सैन्य खींचतान की खबर मात्र से ही कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में उछाल आने लगा है।
शिपिंग इंश्योरेंस: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते खतरे के कारण समुद्री जहाजों का बीमा (Insurance) महंगा हो गया है, जिससे आयात-निर्यात की लागत बढ़ जाएगी।
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