मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की एक बार फिर राज्य स्तरीय  यात्रा निकली,यात्रा की शुरूआत बेतिया से और समापन मोतिहारी में हुआ

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अशोक वर्मा

मोतिहारी : न अपने चिर परिचित अंदाज में लंबे चौड़े घोषणाओं का लिस्ट लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार यात्रा पर निकले है।यात्रा की शुरुआत 16 जनवरी को बेतिया रमना मैदान से हुआ तथा दूसरे दिन मोतिहारी में सभा हुई। दोनों जिले में मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक बैठक भी की और विकास कार्यो की समीक्षा की गई।मोतिहारी की सभा में मुख्यमंत्री ने अब तक किए गए कार्यों की सूची पढी, जिसमें साइकिल, पोशाक, महिला आरक्षण सात निश्चय, नल जल योजना आदि के वर्णन हुए।मुख्य मंत्री ने एक नई बताई ।सरकारी डॉक्टरों का प्राइवेट प्रैक्टिस बंद होगा बस इस एक नयापन के अलावा और कोई बात  नहीं हुई। आम जनता को मुख्यमंत्री से दूर रखने का प्रयास किया गया। प्रशासन इस मामले में विशेष चौकस  था ।एक परिंदा भी मुख्यमंत्री के पास नहीं पर नही मार सकता था। दोनों जिला में प्रशासन के लोग इस बात पर जयादा अलर्ट थे कि अतिक्रमण उजड़ों एवं बेतिया राज की जमीन खाली करो का मुद्दा चंपारण में गर्म  है और दिनो दिन विस्फोट स्थिति  मे होने की संभावना है।इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को हल्की लाठी चार्ज भी करके भीड को हटाना पड़ा। कोई आम जनता मंच तक नहीं जाए इसके लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था किया गया था। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में नई योजनाओं के बारे में कहा कि अब ग्रामीण सड़कों का भी चौड़ीकरण किया जाएगा तथा नए-नए उद्योग स्थापित किए जाएंगे ।मुख्यमंत्री का भाषण इस बार मौखिक नहीं हुआ बल्कि लिखित भाषण था। शायद आवाज लडखडाने  के कारण इस तरह की व्यवस्था की गई थी। पार्टी के नजदीकी कार्यकर्ता  भी मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाए और मुख्यमंत्री निर्धारित समय से कुछ विलंब से पहुंचे।जीवीका दीदी से बाते की और  सभा संपन्न कर  निकल पड़े। मुख्यमंत्री के साथ दोनों उपमुख्यमंत्री थे तथा चंपारण के जदयू के दोनों मुख्य विधायक भी मौजूद थे ।सांसद मोतिहारी के न रहने के कारण मंच पर सुन्नापन रहा ।विधायक प्रमोद कुमार भी आख का ऑपरेशन कराने दिल्ली गए हुए हैं। इस तरह से जदयू का ही मंच पर कब्जा रहा।म एनडीए गठबंधन कहने भर का रहा। मुख्य रूप से जदयू के लोगों का वर्चस्व  बना रहा।उजडी  जनता आक्रोशित है और  खुले आकाश के नीचे उजड़ने के बाद हजारों की संख्या में अपने परिवार के साथ  रात बिता रही हैं। बुलडोजर संस्कृति हॉबी है और तेजी से कार्यरत है। अपराधी काउंटर के डर से भागे हुए हैं। मिला-जुला कर  स्थिति शांत रही  लेकिन जिले का यह शांति तूफान के पहले की शांति समान है  ।

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