जय गुरुदेव महाराज के परम शिष्य उमाकांत जी महाराज का दो दिवसीय भव्य कार्यक्रम -आयोजित

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  • एक लाख से ज्यादा शिष्य  आये है कार्यक्रम  मे
  • 2026 का वर्ष विनाशकारी ,बचे वही जो नाम अधारी : उमाकांत महाराज   

अशोक  वर्मा

मोतिहारी : वर्ष के अंतिम दिन नगर के हवाई अड्डा मैदान में जय गुरुदेव महाराज के परम शिष्य श्री उमाकांत महाराज जी का दो दिवसीय  संगत प्रवचन माला  कार्यक्रम का शुभारंभ बुधवार को हुआ । विशाल पंडाल के साथ-साथ रहने की भी समुचित व्यवस्था की गई थी ।संगत प्रवचन माला में बिहार के लगभग सभी जिले के शिष्यो की भागीदारी हुई। इसके अलावा छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश के एवं अन्य कई राज्यों से शिष्य पधारे थे। विश्व प्रसिद्ध जय गुरुदेव महाराज के परम शिष्य श्री उमाकांत जी महाराज ने अपने प्रवचन माला में कहा कि गलत ढंग से पैसा कमाने वाले लोग सुख शांति चाहते हैं जो असंभव है ।गलत का रिजल्ट हमेशा गलत ही होगा। सरकार भी गलत कार्य को प्रोत्साहित कर रही है जिसमें शराब मांस की बिक्री और अन्य अनैतिक कार्य आज देश में धड़ल्ले से हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीव हत्या कर उसको भोजन के रूप में लेने वाले कभी भी खुशहाल नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि वर्तमान भागदौड़ के जिंदगी में लोगों के पास सत्संग में बैठने का समय नहीं है ,रोजी-रोटी कमाने खाने के चक्कर में और धन दौलत इकट्ठा करने के फिराक में सत्संग में वे नहीं आ पाते हैं ।दूसरी बात की लोगों की ज्ञानवर्धक बातों को सुनने की भी फुर्सत नहीं मिल रही है ।जिस तरह लोग बिजनेस व्यापार खेती की आदि करते हैं उसके लिए समय निकालते हैं उसी तरह सत्संग के लिए भी समय निकालना चाहिए।  पहले जगह-जगह सत्संग होता रहता था, लोग सत्संगों में रुचि भी रखते थे हर तरह की सीख मिलती थी, जानकारियां मिलती थी सत्संग  से दिशा मिलती थी जिससे संयमित जीवन जीते थे,बीमार नही पडते थै।  लड़ाई झगड़ा से भी वंचित रहते थे लेकिन आज चारों तरफ भाई-भाई पिता पुत्र ,पति पत्नी के बीच लड़ाई झगड़ा का पूरा माहौल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सत्संग छोड़ देने से ही सारी परेशानियां और तकलीफे बढी है ।आज दिनों दिन बढ़ रहे  शराब और अन्य नशा के प्रचलन को सबसे घातक कहा। श्री उमाकांत महाराज ने कहा कि सभी धर्म के लोग उस मलिक को याद करो उसको अपना सहारा बनाओ। समुद्र देवता ,पवन देवता ,मेघराज, अग्नि देवता आज लोगों के बुरे कर्मों से काफी नाराज हो गए हैं और वे सभी सजा देने के लिए बेचैन है ।उन्होंने कहा कि पाप से बचो और दूसरों को भी बचाओ ,बुरे की बुराई छुड़ा देना पुण्य का काम होता है ।उन्होंने बर्बादी के लिए तीन चीजों को मुख्य कारण बताया- शराब कबाब और शबाब। उन्होंने कौमवाद,और जातिवाद के झगड़ों को  मीठा जहर कहा। है बुराई को बढ़ावा देना पाप को बढ़ाना है ,उन्होंने रोज सत्संग सुनने के फायदे भी बताया। दुनिया बनाने वाला ही जब मिल जाता है तो दुनिया की चीजों के लिए भागना नहीं पड़ता है वह स्वतः ही मिल जाती है इसलिए दुनिया को जिसने बनाया है उससे संबंध जोड़ो ।उन्होंने कहा समरथ गुरु जिनको  पकड़ते हैं छोड़ते नहीं पार करके ही दम लेते हैं। उन्होंने  कहा कि समय भयानक रूप ले रहा है, शाकाहारी बनो ।उन्होंने यह भी कहा कि जो निभया और जिह्वा पर कंट्रोल कर देता है वह कहीं पर भी रहता है तो सुखी रहता है ।आज दुनिया मे चरित्र मे तेजी से गिरावट हो रही है,सत्संगी कभी भी चरित्र हीन नही हो सकता।कहा कि मनुष्य का शरीर बहुत अनमोल चीज है इसको सही कार्य में लगाओ ।अपने प्रवचन माला  के प्रथम दिन उन्होंने कहा कि तू क्या लेकर के जग में आया है और क्या लेकर के जाएगा सोच समझ लो ये मेरे प्यारे  सब धरा यही रह जाएगा ।तीन घंटे के प्रवचन माला  में कड़ाके की ठंड एवं पछुआ हवा के बीच खुले आकाश के नीचे भी बैठकर लोग सुनते रहे। भीड़ इतनी अधिक थी कि समियाना छोटा पड़ गया था ।उक्त अवसर पर उन्होंने नए शिष्य भी बनाए गए। मैदान मे भंडारा का भी बहुत अच्छा आयोजन किया गया था। अलग-अलग कैंप लगे हुए थे ,मेडिसिन का भी कैंप लगा हुआ था, डॉक्टर भी बैठे हुए थे गाड़ियों का बहुत काफिला लगा हुआ था ।बहुत बड़े मैदान में आयोजित यह कार्यक्रम मोतिहारी के लिए एक एतिहासिक कार्यक्रम था।

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