कंटेट क्रिएटर नहीं, कंटेट रिर्फामर बनें : प्रो.संजय द्विवेदी

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  • प्रो. द्विवेदी ने कहा कि लोकप्रियता से अधिक जरूरी यह है कि सामग्री समाज को बेहतर बनाए, नागरिक विवेक को विकसित करे और संवाद की संस्कृति को मजबूत करे।
गया जी।भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी का कहना है डिजिटल मीडिया के व्यापक प्रभाव के कारण बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ जाती है। इसलिए जरुरी है कि हम सिर्फ कंटेंट क्रिएटर नहीं, उससे आगे कंटेंट लीडर और कंटेंट रिर्फामर बनें। करोड़ों लोगों तक पहुँचने वाला प्रत्येक शब्द, प्रत्येक विचार और प्रत्येक दृश्य अपने आप में एक संदेश है। इसलिए यह सिर्फ वायरल नहीं बल्कि मूल्यवान भी होना चाहिए।
वे वेब जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा भागलपुर में आयोजित ‘वेब मीडिया समागम-2025’ को संबोधित कर रहे थे।इस  कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री  अश्विनी कुमार चौबे, वरिष्ठ पत्रकार डॉ.बृजेश कुमार सिंह,संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष  आनंद कौशल, राष्ट्रीय महासचिव डा. अमित रंजन विशेष रूप से सहभागी रहे हैं।
समागम में देश भर के डिजिटल मीडिया दिग्गजों ने कई सत्रों में विमर्श किया और संगठन विस्तार पर भी चर्चा की। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि लोकप्रियता से अधिक जरूरी यह है कि सामग्री समाज को बेहतर बनाए, नागरिक विवेक को विकसित करे और संवाद की संस्कृति को मजबूत करे।
फेक न्यूज़, तथ्यहीन दावे और सनसनीखेज प्रस्तुति विश्वसनीयता के संकट को जन्म दे रहे हैं। एल्गोरिद्म की मजबूरी क्रिएटर्स को रचनात्मकता से दूर ले जाकर केवल ट्रेंड के पीछे भागने के लिए विवश कर रही है। उन्होंने कहा कि लाइक्स, फॉलोअर्स और व्यूज़ की अनवरत दौड़ मानसिक तनाव और आत्मसम्मान के संकट को बढ़ा रही है।ध्रुवीकरण और ट्रोल संस्कृति समाज के ताने-बाने को कमजोर कर रही है। प्रोफेसर द्विवेदी ने कहा कि जिम्मेदार क्रिएटर की पहचान सत्य, संवेदना और सामाजिक हित से होती है। विश्वसनीय जानकारी देना, सकारात्मक संवाद स्थापित करना, आंचलिक भाषाओं और स्थानीय मुद्दों को महत्व देना, जनता की समस्याओं को स्वर देना और स्वस्थ हास्य तथा मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखना आज की डिजिटल नैतिकता के प्रमुख तत्व हैं।
उन्होंने वेब पत्रकारों का आह्वान करते हुए कहा कि आपके पास केवल कैमरा या रिंग लाइट नहीं है; आपके पास समाज को रोशन करने की रोशनी है। आप वह पीढ़ी हैं जो बिना न्यूज़रूम के पत्रकार, बिना स्टूडियो के कलाकार और बिना मंच के विचारक हैं। जाहिर है तोड़ने वाले बहुत हैं अब कुछ ऐसे लोग चाहिए जो देश और दिलों को जोड़ने का काम करें।
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