सृष्टि सिन्हा मौत मामला: डॉ. अभिजीत सिन्हा ने लगाए गए आरोपों को बताया बेबुनियाद, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

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विशेष संवाददाता अनूप नारायण सिंह।

पटना : बुद्धा कॉलोनी स्थित अपने आवास में सृष्टि सिन्हा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने जहां एक ओर सामाजिक व पारिवारिक बहस को जन्म दे दिया है, वहीं अब मृतका के पति डॉ. अभिजीत सिन्हा ने पहली बार इस पूरे मामले में खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को नकारते हुए इसे एकतरफा और तथ्यों से परे बताया है।

डॉ. सिन्हा के अनुसार, सृष्टि पिछले कुछ महीनों से गहरे मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रही थीं। “हमने उन्हें कई बार मनोवैज्ञानिक सलाह लेने को कहा था, लेकिन वे तैयार नहीं होती थीं। बच्चों के साथ भी उनका व्यवहार हाल ही में असामान्य हो गया था,” उन्होंने बताया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घटना के वक्त परिवार पूरी तरह से स्तब्ध था, और इसी घबराहट में उन्होंने शव को तुरंत अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया, ताकि कोई चिकित्सा सहायता मिल सके। पुलिस को सूचना देर से देने के पीछे उन्होंने यही कारण बताया।
डॉ. सिन्हा पर ससुराल पक्ष ने विवाहेतर संबंध और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, जिसे वे सिरे से खारिज करते हैं। “मेरे चरित्र को बिना किसी पुख्ता प्रमाण के सार्वजनिक रूप से कलंकित किया जा रहा है, यह बेहद दुखद है। मैं एक पारिवारिक व्यक्ति हूं और अपने बच्चों की भलाई के लिए ही कुछ समय के लिए शहर से बाहर गया था,” उन्होंने कहा।
डॉ. सिन्हा का कहना है कि मीडिया में लगातार हो रही एकतरफा रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया ट्रायल के चलते उन्हें न्याय प्रक्रिया में अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीएमसीएच में पोस्टमार्टम के दौरान उनके और उनके परिवार के साथ मारपीट की गई, जिसके कारण वे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके।
उन्होंने पुलिस और प्रशासन से अपील की है कि जांच को पूर्वाग्रह से मुक्त और केवल तथ्यों के आधार पर किया जाए। “हम किसी भी जांच से भाग नहीं रहे हैं, लेकिन हमें भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए,” डॉ. सिन्हा ने कहा।
डॉ. सिन्हा के अधिवक्ता ने दावा किया कि मृतका के परिजनों द्वारा की जा रही लगातार शिकायतों के चलते डॉ. सिन्हा के दोस्तों और रिश्तेदारों को भी पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है, जो कानूनन और मानवीय रूप से अनुचित है।
डॉ. सिन्हा ने अंत में समाज से भी अपील की कि इस संवेदनशील मामले में बिना साक्ष्य के कोई निष्कर्ष न निकाला जाए और न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखा जाए।
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