नाबार्ड ने किया महिला अधिकार जागरूकता  संगोष्ठी

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अशोक वर्मा
मोतिहारी : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक आनंद अतिरेक द्वारा चिलवनिया में महिला सशक्तिकरण पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्याओं, जीविका सामुदायिक उत्प्रेरकों और बैंकों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को वित्तीय और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करना था। इस कार्यक्रम ने ग्रामीण महिलाओं की उपलब्धियों को पहचानने और मान्यता देने के लिए एक मंच प्रदान किया।
नाबार्ड के डीडीएम आनंद अतिरेक ने ‘वादों से प्रगति की ओर’ विषय पर उपस्थित महिलाओं को संबोधित किया और उन्हें उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और वित्तीय समावेशन के महत्व के बारे में जानकारी दी। प्रतिभागियों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, लखपति दीदी योजना, योजना और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी विभिन्न सरकारी पहलों के बारे में अवगत कराया गया। बैंक अधिकारियों ने महिला उद्यमियों के लिए ऋण आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज़ और पुनर्भुगतान प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि SHG समूहों को रियायती दरों पर वित्तीय सहायता कैसे प्राप्त हो सकती है। कृषक विकास समिति के अध्यक्ष उमाशंकर प्रसाद ने महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर आगे बढ्ने की सलाह दी।
महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी उपायों की जानकारी दी गई।  साथ ही, उन्हें डिजिटल लेन-देन की सुरक्षा, बैंकिंग धोखाधड़ी से बचाव के बारे में भी शिक्षित किया गया। जीविका SHG की सदस्यों और सामुदायिक उत्प्रेरकों ने इस कार्यक्रम के लिए नाबार्ड का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था, जिससे वे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के प्रति अधिक जागरूक हुई हैं। कई महिलाओं ने यह भी साझा किया कि वे अब अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करेंगी। कार्यक्रम के दौरान, कुछ महिलाओं ने अपनी सफलता की कहानियाँ भी साझा कीं, जिनमें उन्होंने बताया कि किस प्रकार सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सहायता के माध्यम से उन्होंने अपने व्यवसाय को स्थापित किया और आत्मनिर्भरता प्राप्त की। इन प्रेरणादायक कहानियों ने अन्य महिलाओं को भी अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर, नाबार्ड के DDM आनंद अतिरेक ने नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं जैसे माइक्रो एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम (MEDP), लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम (LEDP), फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPO) और कौशल विकास कार्यक्रम (Skill Development Program) की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से महिलाएँ अपने उद्यम को आगे बढ़ा सकती हैं और आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
नाबार्ड के DDM ने आश्वासन दिया कि महिलाओं के आर्थिक विकास के लिए इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन भविष्य में भी किया जाता रहेगा। बैंकों और SHG सदस्यों के सहयोग से, महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर प्रेरित करने के लिए और अधिक प्रयास किए जाएंगे। यह पहल न केवल महिलाओं को आवश्यक ज्ञान से सशक्त बनाने का कार्य कर रही है, बल्कि वित्तीय समावेशन और उद्यमिता विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
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