फाइलेरिया का इलाज नहीं, बचाव के लिए 10 फरवरी से एमडीए के दौरान खाएं दवा: जिलाधिकारी

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  • 17 कार्य दिवसों का होगा सर्वजन दवा अभियान 
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व सदर अस्पताल में होगा हाइड्रोसील का निशुल्क ऑपरेशन
शिवहर। सर्वजन दवा अभियान पूरी तरह वैज्ञानिक अवधारणाओं पर आधारित है। फाइलेरिया या हाथीपांव का कोई इलाज नहीं है। इससे बचने का एक ही तरीका है कि 10 फरवरी से जिले में शुरू होने वाले सर्वजन दवा सेवन अभियान में दी जाने वाली दवा का सेवन करें। यह दवा आपको भविष्य में न सिर्फ फाइलेरिया से बचाएगी बल्कि आपको इस बीमारी के वाहक बनने से भी बचाएगी। इस बार भी जिले में अभियान में ट्रिपल ड्रग थेरेपी के तहत तीन तरह की दवा (आइवरमेक्टिन, डीईसी, एल्बेंडाजोल) दी जाएगी। ये बातें जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने समाहरणालय के संवाद सभागार में जिला प्रशासन, जिला स्वास्थ्य समिति एवं सीफार (सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च) की ओर से आयोजित सर्वजन दवा सेवन के मीडिया उन्मुखीकरण के दौरान कही। मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान किसी भी प्रतिकूल प्रभाव पर फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान वे वैज्ञानिक तथ्य एवं चिकित्सकों से उचित तथ्य जरूर जान लें।
पहले तीन दिन स्कूलों में लगाए जाएंगे बूथ:
मीडिया उन्मुखीकरण के दौरान डॉ सुरेश राम ने बताया कि यह अभियान 10 फरवरी से 17 कार्यदिवसों का होगा। इसके पहले तीन कार्यदिवस स्कूलों में बूथ लगाकर दवा खिलाई जाएगी। वहीं 14 दिन डोर टू डोर दवा एडमिनिस्ट्रेट की जाएगी। 14 कार्यदिवसों के सातवें तथा 14 वें दिन मॉप अप राउंड भी चलाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर इसके आगे भी मॉप अप राउंड चलाया जाएगा। किसी भी प्रकार की विपरीत परिस्थिति से बचने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। इस कार्यक्रम में जिले के 02 वर्ष से अधिक के सभी व्यक्तियों को ( पांच वर्ष से ऊपर डोज पोल के तहत) दवा खिलाई जाएगी। जिन्हें दवा नहीं देनी है उनमें दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती स्त्री एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति शामिल है। अभियान के दौरान लगभग 526 स्कूल बूथ लगाए जाएगें। इसके अलावा अभियान के दौरान दवा खिलाने के लिए 372 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर की टीम तथा 38 सुपरवाइजर तैनात किए जाएगें। जिले में लगभग 7 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य है।
स्वस्थ व्यक्ति भी खाएं दवा:
इस दौरान सिविल सर्जन डॉ देवदास चौधरी ने बताया कि यह फाइलेरिया रोधी दवाएं स्वस्थ एवं फाइलेरिया से ग्रसित दोनों ही व्यक्तियों को खानी है। इससे संक्रमण के प्रसार पर विराम लगेगा। दवा खाने पर उल्टी,चक्कर या पेट में दर्द जैसे लक्षण हो तो समझें कि आप में माइक्रोफाइलेरिया हैं। यह सामान्य से प्रतिकूल लक्षण स्वतः समाप्त हो जाते हैं। अगर किसी भी तरह की समस्या हो तो आशा कार्यकर्ता को तुरंत सूचित करें।
निशुल्क हो रहा हाइड्रोसील का ऑपरेशन:
भीबीडीसी मोहन कुमार ने बताया कि हाइड्रोसील में सूजन भी फाइलेरिया रोग ही है। हाइड्रोसील का ऑपरेशन इसका निदान है। जिले में यह निशुल्क किया जा रहा है। अगर कोई भी व्यक्ति हाइड्रोसील का ऑपरेशन कराना चाहता है तो वह अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सदर हॉस्पिटल से संपर्क कर सकता है।
जिलाधिकारी के द्वारा पांच जागरूकता रथ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। जो सभी प्रखंडों में जाकर फाइलेरिया से संबंधित प्रचार प्रसार करेगी।
उन्मुखीकरण के दौरान सिविल डॉ देवदास चौधरी, जिला भी बी डी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सुरेश राम, ओएसडी आफताब करीम, डीभीबीडीसी मोहन कुमार, पिरामल के रोहित कुमार गांधी फेलो, पीएल सागर राय सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।
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