आचार्य रामाश्रम सत्संग मथुरा के सानिध्य में भजन प्रवचन ध्यान प्रसाद अर्पण किया गया

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 गया। रामाश्रम सत्संग मथुरा उपेंद्र गया के द्वारा आयोजित गुरु पूर्णिमा के मौके पर निगमा धर्मशाला बोधगया में चल रहे दो दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग समारोह आयोजित किया गया।परम पूज्य डॉक्टर ऋषि कुमार मुकुल आचार्य रामाश्रम सत्संग मथुरा के सानिध्य में भजन प्रवचन और ध्यान प्रसाद अर्पण के साथ समापन किया गया है ‌।इस भव्य गुरु दरबार में बिहार के भाई, बहन, माता शामिल हुए. पूज्य मुकुल भैया जी ने अपने संबोधन में गुरु की महिमा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि संसार में दो मार्ग हैं परवृत्ति का और निर्विर्ति का प्रवृत्ति मार्ग हमें संसार की ओर ले जाता है जो शुरू में सुखद प्रतीत होता है लेकिन बाद में दुखदाई हो जाता है। निरवृत्ति का मार्ग हमें परमात्मा की तरफ ले जाता है इस मार्ग में संसार छूट जाता है यह सन्यासी मार्ग है गुरु महाराज ने एक तीसरा रास्ता बताया प्रवृत्ति में निर्विति का संसार में रहते हुए नौकरी, व्यापार, गृहस्थी आदि करते हुए मन को परमात्मा में लगाए रखना गीता में इसी को मध्यम मार्ग कहा गया है भगवान बुद्ध ने सम्यक मार्ग कहा है।
निखिल कुमार मीडिया प्रभारी ने बताया कि गुरु के चरणों में कोटीसा प्रणाम गुरु से मिलना और बात है लेकिन गुरु में मिलना दूसरी बात है शास्त्र ऐसा बताते हैं कि गुरु दर्शन बराबर करते रहना चाहिए अगर बीच में संभव न हो तो गुरु पूर्णिमा के दिन एक बार जरूर मिलना चाहिए.गुरु शिष्य के हृदय को पूर्ण प्रकाशित कर देता है।इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ दिग्विजय सिंह बघेल, आनंद स्वरूप करण,, बीबी सिंह, अनिरुद्ध कुमार सिंह, अशोक सिंह, अनिल सिंह, रतनलाल शर्मा, रमेश वर्मा, लक्ष्मण जी, विवेकानंद जी, केडी पांडे, मिथिलेश वर्मा, बिहारी जी, जगरोपण जी, वाल्मीकि शर्मा, पप्पू सिंह, अजय सिंह, सुधीर सिंह, कामता प्रसाद, मनोज कुमार, आलोक कुमार सिंह, लवकुश जी, सुनील कुमार, लखन पंडित, अमित जोशी, बिट्टू सिंह, विजय जोशी, पुरुषोत्तम सिंह, राकेश , अमित , पवन कुमार, अरविंद कुमार, शंकर उपाध्याय, छोटू जी, गिरजानंद जी, जितेंद्र कुमार, संजय कुमार, प्रमोद कुमार, धर्मेंद्र कुमार, लखन सिंह, सुरेंद्र सिंह, अरविंद सिंह, गोपाल सिंह, रामबली जी, नीतू सिंह, कल्याणी सिंह, रेखा सिंह, शिल्पी सिंह, रुबी दीदी, सुमन दीदी आदि लोगों का सहयोग बहुत सराहनीय और प्रसंसनीय रहा है
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