दुनियाभर में सांप की ढाई से तीन हजार प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से कई सांपों की प्रजातियां काफी दुर्लभ हैं. इसी में से एक प्रजाति उड़ने वाला सांपों की भी होती है, जिसका रेस्क्यू पश्चिमी चम्पारण के वाल्मीकिनगर के एक घर से किया गया. रेस्क्यू किए गए तक्षक नाग से कई धार्मिक कहानियां भी जुड़ी हैं.
लेकिन आज इंडो नेपाल सीमा अंतर्गत वाल्मीकीनगर के टंकी बाजार में दुर्लभ ‘तक्षक नाग’ को रेस्क्यू किया गया. दरअसल इस सांप को देख परिजन काफी डर गए और फिर रेस्क्यू टीम को इसकी सूचना दी गई. जिसके बाद भारतीय वन्य जीव संस्थान NMCG के फील्ड असिस्टेंट मुकेश कुमार और उनके सहयोगी सुनील कुमार द्वारा इस सांप का रेस्क्यू कर वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया.
जैसे ही इस सांप को जंगल में छोड़ा गया यह पेड़ की एक डाली पर जा बैठा. उड़ने वाले इस सांप को ऑर्नेट फ्लाइंग स्नेक कहा जाता है. भारतीय वन्य जीव संस्थान NMCG के फील्ड असिस्टेंट मुकेश कुमार और उनके सहयोगी सुनील कुमार ने बताया की यह सांप काफी दुर्लभ होता है और जल्दी दिखाई नहीं पड़ता.
वीटीआर में इसकी संख्या काफी कम है. यह मॉनसून सत्र में ही देखने को मिलता है. दो वर्ष पहले इस सांप को जटाशंकर शिव स्थान पर देखा गया था. तबसे वनकर्मी इसका दीदार करने को तरस रहे थे, क्योंकि यह दिखने में काफी सुंदर होता है लेकिन कम जहरीला होता है. पेड़ों पर रहने वाला यह सांप उड़कर एक डाली से दूसरे डाली पर पहुंचता है. अमूमन इसे बरसात के मौसम में देखा जाता है.
हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, तक्षक नागों में से एक नाग कश्यप का पुत्र था शेषनाग और वासुकी के भाई है। तक्षक : बता दें की नागोंं में शेषनाग सबसे बड़े, वासुकी दूसरे और तक्षक तीसरे भाई हैं. जब शेषनाग भगवान विष्णु की शरण में गए तब उन्होंने वासुकी का राजतिलक करवा दिया और उन्हें नागलोक का राज्य सौंप दिया गया. वासुकी ने कई वर्षों तक नागलोक पर शासन किया और भगवान शिव की सेवा के लिए अपने बड़े भाई शेषनाग की तरह ही राजपाट त्याग दिया और नागलोक से जाते जाते उन्होंने अपने छोटे भाई तक्षक का राजतिलक करवा दिया.
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