- गंगा सिर्फ एक नदी नही हमलोग उसे माँ मानते है, हमलोगों का श्रद्धा, किसानों एवं बिहार वासियों को ध्यान में रखकर करने की मांग- जिलाअध्यक्ष अजय कुशवाहा
गया जी। हमलोग फरक्का (गंगा) जल संधि से बिहार के हकमारी पर चर्चा कर रहें है, और हमलोग स्पष्ट रूप से मांग भी करते है कि इसका नवीनीकरण नहीं हों और इस मुद्दे पर पार्टी के शिर्ष नेताओं द्वारा इस कार्यक्रम के तहत गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में संवाद किया जा रहा है, जो इस संधि के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं। पार्टी के इस जन जागरुकता अभियान का शुभारंभ 5 सितंबर को बक्सर से हुआ है, जबकि समापन कटिहार में होगा क्योंकि बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है।
फरक्का जल संधी पर नीतीश संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। हमारे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने भी कहा है और हमारे पार्टी का साफ स्टैण्ड है कि 1996 में
भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि भारत के, खासकर बिहार के हित में नहीं है। अभी हाल में संसद के मानसूत्र सत्र के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने राज्यसभा में बड़ी मुखरता से इस विषय को उठाया था कहा कि इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और अगर कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस जल संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन बुरी तरह बिगड़ा है और हम गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं।
फरक्का (गंगा) जल संधि के मुताबिक शुष्क मौसम में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूमेक तक रह जाता है, तब भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक पानी छोड़ना पड़ता है, इसका मतलब यह है कि सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है जो सीधे तौर पर बिहार की हकमारी है। सरकार यह भी विचार करे की बिहार के किसानों की सिंचाई,लोगों का पेयजल, उद्योगों को पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री विकास पुरूष नीतीश कुमार शुरू से कहते रहे हैं कि फरक्का बराज एवं फरक्का जल संधि से बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हम बताना चाहते है कि एक ओर फरक्का बराज के कारण गंगा में भारी गाद जमा हो जाने से नदी का तल ऊँचा हो गया है, जिसके कारण उत्तर बिहार को हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ता है, तो दूसरी ओर फरक्का जल संधि के कारण शुष्क मौसम में हमें बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को देना पड़ता है। और बिहार के कई जिलों में सूखे तक की स्थिति हो जाती है। इस अंतर्राष्ट्रीय संधि का 73% बोझ अकेले बिहार उठा रहा है। यह बिहार के साथ ज्यादती है, इसीलिए पार्टी फरक्का जल संधी पर नीतीश संवाद अभियान के माध्यम से बतानी चाहती है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रयासों से आज यह मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श का विषय बन चुका है।
जदयू की ये पहल किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि ये हमारी पार्टी का जनसरोकार से जुड़ा मुदा है। ये बिहार के हक और बिहारवासियों के हित की बात है। हमें पता होना चाहिए कि फरक्का (गंगा) जल संधि के कारण बिहार को कैसे और कितना नुकसान हो रहा हमलोग बिहार की आवाज केन्द्र तक पहुँचाना चाह रहे हैं। क्योंकी गंगा सिर्फ एक नदी नही हमलोग उसे माँ मानते है, हमलोगों का श्रद्धा है।
इसिलिए गंगा नदी से जुड़े सवाल देश के सामने आएं और फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार हो।
इस अभियान में आप सभी पत्रकार भाई एवं मिडिया बंधुओं का भी सहयोग करें।
इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विधायक मनोरमा देवी ने संबोधित किया है ।इस अवसर पर जिला उपाध्याय मधुसुदन राय, सोनम दास, पुनम कुशवाहा, राम लखन स्वर्णकार ,प्रभात राउत, दिनेश कुमार सिन्हा, कैलाश पासवान, सम्भु सिह, प्रकाश राम पटवा, विनोद यादव,बलीराम चौधरी, गोपाल चंद्रवंशी, अरुण कुमार राव, नंदकिशोर चौधरी।
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