गया। गया कॉलेज, गया के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा ‘विनोबा भावे के विचारों की प्रासंगिकता’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय तिवारी ने की, जबकि मंच संचालन लोक प्रशासन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार द्वारा किया गया है। इस कार्यक्रम में गया कॉलेज के बर्सर डॉ. मार्कण्डेय पांडे एवं एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान डॉ. मार्कण्डेय पांडे ने अकादमिक संस्थानों में ऐसे व्याख्यानों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बताया, वहीं डॉ. राजेश मिश्र ने विनोबा जी के विचारों को एनएसएस की सेवा भावना से जोड़ा है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राजकीय डिग्री महाविद्यालय, पकड़ीदयाल (बी.आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर) के प्रभारी प्राचार्य डॉ. कृष्ण कुमार कृष्ण ने आचार्य विनोबा भावे के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि विनोबा भावे केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि भारतीय समाज में न्याय, समानता, अहिंसा, ग्राम स्वराज, सर्वोदय और मानवीय मूल्यों के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने भूदान आंदोलन का उल्लेख करते हुए बताया कि विनोबा जी ने भूमि के असमान वितरण का समाधान हिंसा के बजाय नैतिक अपील, स्वैच्छिक त्याग और सामाजिक सहयोग के माध्यम से प्रस्तुत किया है। उनके विचार आज के बदलते सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवेश में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
व्याख्यान के दौरान डॉ. प्रशांत कुमार ने विनोबा भावे के राजनैतिक दर्शन का आलोचनात्मक परीक्षण किया है। इस कार्यक्रम में डॉ. संगीता, डॉ. पुष्पा कुमारी सोनी, डॉ. शैलेंद्र कुमार सहित राजनीति विज्ञान एवं अन्य विभागों के शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इस व्याख्यान ने विद्यार्थियों को भारतीय राजनीतिक चिंतन की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया। अंत में डॉ. शैलेंद्र द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ है।
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