रामगढ़/भभुआ। कैमूर के रामगढ़ थाना क्षेत्र में आर्मी जवान शत्रुघ्न यादव को स्कॉर्पियो में बंद कर जलाने के प्रयास के आरोपों को लेकर मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए तीन लोगों को पीआर बॉन्ड पर छोड़े जाने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली। शुक्रवार को जवान की पत्नी बिंदु कुमारी सिंह के साथ सहुका गांव के करीब 70 ग्रामीण भभुआ पहुंचे और डीआईजी हरप्रीत कौर तथा एसपी शिखर चौधरी से मुलाकात कर मामले में निष्पक्ष जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की।
ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटनास्थल के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि मामले में कुछ चुनिंदा फुटेज के आधार पर तीन लोगों को पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया गया, जबकि घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की भी गहन जांच जरूरी है।
जवान की पत्नी बिंदु कुमारी सिंह ने बताया कि उनके पति का इलाज लखनऊ के आर्मी अस्पताल में चल रहा है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के सामने मामले से जुड़े कई सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत किए और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कराने की मांग की।
बताया गया कि मामला वाराणसी में जमीन की खरीद और रुपये के लेन-देन से जुड़े पुराने विवाद से जुड़ा हुआ है। परिजनों के अनुसार बुधवार की अहले सुबह जवान को रुपये के लेन-देन के बहाने रामगढ़ बुलाया गया था। इसके बाद स्कॉर्पियो में जलाने के प्रयास का आरोप लगाया गया। घटना के बाद जवान की पत्नी ने डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी थी।
पुलिस ने उसी दिन अधजली स्कॉर्पियो के साथ तीन लोगों को हिरासत में लिया था। हालांकि बाद में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले के घटनाक्रम की जांच शुरू की गई और तीनों को पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया गया। पुलिस के अनुसार फुटेज में जवान को स्कूटी से वार्ड संख्या एक की ओर जाते और बाउंड्री फांदकर एक हाते में प्रवेश करते देखा गया है। इसी बिंदु समेत मामले के अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
एसपी शिखर चौधरी ने बताया कि परिजनों के आवेदन के आधार पर करीब दो दिन पहले इस मामले में केस दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और कई साक्ष्यों की जांच की जा रही है। एसपी ने कहा कि परिजनों की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने की बात सामने आई है, लेकिन पुलिस साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
एसपी ने स्पष्ट किया कि पीआर बॉन्ड पर छोड़े गए लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में उनकी संलिप्तता सामने आती है तो उनकी दोबारा गिरफ्तारी की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और घटना में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने साफ कहा कि दोषी किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे।
इधर, ग्रामीणों का कहना है कि जवान की हालत और घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को मामले से जुड़े प्रत्येक साक्ष्य की गहराई से जांच करनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित हो।
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