बिहार के छपरा (सारण) जिले से एक बेहद हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जिसने राज्य में शराबबंदी के दावों की पोल खोलकर रख दी है। तेज रफ्तार से आ रही एक कार, जो अवैध शराब की खेप से पूरी तरह लदी हुई थी, उसने एक युवक को बुरी तरह कुचल दिया। इस दर्दनाक हादसे में युवक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद जब गुस्साए ग्रामीणों ने कार की तलाशी ली, तो उसमें शराब की बोतलें देख उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। लोगों ने पुलिस के सामने ही सड़क पर शराब की बोतलें फोड़कर अपना विरोध दर्ज कराया।
रफ्तार का कहर और शराब का काला खेल
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह हादसा छपरा के रिविलगंज थाना क्षेत्र के पास हुआ। कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि ड्राइवर का नियंत्रण बिगड़ गया और उसने सड़क किनारे खड़े युवक को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के तुरंत बाद कार सवार तस्कर मौके से फरार होने में कामयाब रहे। जब स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े, तो कार के अंदर विदेशी शराब की सैकड़ों बोतलें देखकर सन्न रह गए। लोगों का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी मात्रा में शराब का परिवहन संभव नहीं है।
सड़क पर संग्राम: लोगों ने प्रशासन को घेरा
हादसे से भड़की भीड़ ने छपरा-सीवान मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। गुस्साए लोगों ने कार से शराब की बोतलें निकाल-निकाल कर सड़क पर ही फोड़ना शुरू कर दिया। सड़क शराब की बदबू और कांच के टुकड़ों से पट गई। सूचना मिलते ही स्थानीय थाने की पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों के आक्रोश के आगे उन्हें पीछे हटना पड़ा। लोग मृतक के परिवार के लिए मुआवजे और शराब तस्करों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत कराने की कोशिश की। पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार को अपने कब्जे में ले लिया है और गाड़ी के नंबर के आधार पर तस्करों की पहचान की जा रही है। छपरा एसपी ने बताया कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी जांच की जाएगी। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।
बिहार में शराबबंदी पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन शराब की गाड़ियां इसी तरह तेज रफ्तार में दौड़ती हैं, जिससे आम लोगों की जान खतरे में रहती है। एक तरफ सरकार नशामुक्त बिहार की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ मौत बनकर दौड़ रही शराब की गाड़ियां प्रशासन की सतर्कता पर तमाचा जड़ रही हैं।
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