बिहार में चौथे चरण की शिक्षक भर्ती (BPSC TRE 4.0) का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने भर्ती प्रक्रिया और जिला आवंटन (District Allotment) के नियमों में आमूल-चूल बदलाव कर दिया है। अब शिक्षकों को मनचाहा जिला पाने के लिए केवल आवेदन करना काफी नहीं होगा, बल्कि उनकी ‘मेरिट’ ही सबसे बड़ा आधार बनेगी।
क्या है नया नियम? मेरिट लिस्ट ही बनेगी ‘बॉस’
अब तक की भर्तियों में जिला आवंटन को लेकर कई तरह की विसंगतियां देखी गई थीं, लेकिन TRE 4.0 में सरकार ने इसे पूरी तरह पारदर्शी बनाने का फैसला किया है।
प्राथमिकता का आधार: अभ्यर्थियों से आवेदन के समय ही तीन जिलों का विकल्प (Choice) मांगा जाएगा।
मेरिट कम चॉइस: यदि आपकी मेरिट (Marks) अच्छी है, तो आपको आपके द्वारा चुना गया पहला जिला आवंटित किया जाएगा।
कम अंक पर क्या होगा? अगर आपकी मेरिट कम है, तो आपको दूसरे या तीसरे विकल्प वाले जिले में भेजा जा सकता है। यदि तीनों विकल्पों में जगह नहीं बचती, तो रिक्तियों के आधार पर रैंडमली किसी भी जिले में नियुक्ति दी जा सकती है।
TRE 4.0 में पदों की संख्या और विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक, चौथे चरण की इस भर्ती में लगभग 1 लाख से ज्यादा पदों पर नियुक्तियां होने की संभावना है। इसमें प्राथमिक (1-5), मध्य (6-8), माध्यमिक (9-10) और उच्च माध्यमिक (11-12) सभी श्रेणियों के शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
अभ्यर्थियों के लिए 3 सबसे बड़े बदलाव:
सप्लीमेंट्री रिजल्ट का प्रावधान: शिक्षा विभाग इस बार वेटिंग लिस्ट या सप्लीमेंट्री रिजल्ट को लेकर भी सख्त रुख अपना सकता है ताकि सीटें खाली न रहें।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (DV): नियुक्ति से पहले ही कागजातों की सघन जांच की जाएगी ताकि ‘फर्जीवाड़ा’ रोकने में मदद मिले।
सक्षमता परीक्षा का प्रभाव: नियोजित शिक्षकों के राज्यकर्मी बनने के बाद रिक्त हुए पदों को भी इसी भर्ती में शामिल किया जा रहा है।
कब आएगा विज्ञापन?
BPSC के परीक्षा कैलेंडर के अनुसार, TRE 4.0 की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। माना जा रहा है कि आवेदन की प्रक्रिया शुरू होते ही अभ्यर्थियों को नए सॉफ्टवेयर के जरिए जिला चयन का विकल्प दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि इस साल के अंत तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
तैयारी करने वालों के लिए सलाह
चूंकि अब जिला आवंटन पूरी तरह मेरिट पर निर्भर है, इसलिए अभ्यर्थियों को केवल ‘पास’ होने के लिए नहीं, बल्कि ‘टॉप स्कोर’ करने के लिए पढ़ाई करनी होगी। होम डिस्ट्रिक्ट या पसंदीदा जिला पाने का अब एकमात्र रास्ता ज्यादा से ज्यादा अंक लाना ही है।
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