उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की हाई-प्रोफाइल सोसाइटी ‘क्रॉसिंग्स रिपब्लिक’ (Crossings Republic) शर्मसार हुई है। यहाँ एक आवासीय परिसर में रहने वाली 7 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ डिजिटल रेप का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को दबोच लिया है।
क्या है पूरा मामला?
वारदात: जानकारी के अनुसार, आरोपी पीड़ित बच्ची का परिचित या पड़ोसी बताया जा रहा है। उसने बहला-फुसलाकर बच्ची के साथ घिनौनी हरकत की।
खुलासा: बच्ची ने जब अपने परिजनों को आपबीती सुनाई और शरीर में तकलीफ की शिकायत की, तब मामले का खुलासा हुआ।
पुलिस कार्रवाई: परिजनों ने तुरंत क्रॉसिंग्स रिपब्लिक थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।
समझें: क्या होता है ‘डिजिटल रेप’? (What is Digital Rape?)
कई लोग ‘डिजिटल’ शब्द का अर्थ इंटरनेट या तकनीक से जोड़ लेते हैं, लेकिन कानून में इसका मतलब पूरी तरह अलग है:
परिभाषा: अंग्रेजी शब्दकोश में ‘Digit’ का एक अर्थ ‘अंगुली’ या ‘अंगूठा’ (Finger or Toe) भी होता है।
कानूनी अर्थ: जब कोई अपराधी किसी महिला या बच्चे के निजी अंगों के साथ अपनी अंगुलियों या अंगूठे का उपयोग कर बिना सहमति के यौन उत्पीड़न करता है, तो उसे कानूनी भाषा में ‘डिजिटल रेप’ कहा जाता है।
सजा: निर्भया कांड के बाद 2013 में हुए कानूनों में बदलाव के बाद, डिजिटल रेप को भी सामान्य बलात्कार (Penetrative Sexual Assault) की श्रेणी में रखा गया है और इसमें भी कठोर सजा का प्रावधान है।
माता-पिता के लिए सुरक्षा टिप्स (Safety Measures for Kids)
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
Body Safety Education: बच्चों को बहुत कम उम्र से ही ‘Good Touch’ और ‘Bad Touch’ के बारे में स्पष्ट रूप से समझाएं।
Open Communication: बच्चों के साथ ऐसा रिश्ता बनाएं कि वे बिना डरे आपसे हर बात साझा कर सकें।
निगरानी: सोसाइटी के कॉमन एरिया, लिफ्ट या पार्क में बच्चों को अकेला न छोड़ें, भले ही वहां सीसीटीवी कैमरे लगे हों।
बदलाव पर नजर: यदि बच्चा अचानक गुमसुम रहने लगे या किसी खास व्यक्ति से मिलने में डरे, तो इसे नजरअंदाज न करें।
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