राज्यपाल ने भिखारी ठाकुर के पोते को दी नौकरी, भोजपुरी समाज में खुशी की लहर

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पटना। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने अपने विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले महान लोकनाटककार भिखारी ठाकुर के पोते को राजभवन में नौकरी प्रदान की है। वर्षों से भिखारी ठाकुर का परिवार आर्थिक तंगी, भूख और गरीबी से जूझ रहा था, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिल पा रही थी।
परिवार ने कई बार विभिन्न दरवाजे खटखटाए, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। ऐसे में राज्यपाल द्वारा लिया गया यह निर्णय न केवल मानवीय संवेदना का परिचायक है, बल्कि भोजपुरी भाषा और संस्कृति के प्रति सम्मान का भी प्रतीक माना जा रहा है।
इस मुद्दे को लगातार उठाने में फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य एवं वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अनूप नारायण सिंह की अहम भूमिका रही। छपरा जिले के मशरख प्रखंड अंतर्गत अरना गांव के निवासी अनूप नारायण सिंह बीते कई वर्षों से अखबारों, सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया चैनलों के माध्यम से भिखारी ठाकुर के परिवार की बदहाली को सामने लाते रहे थे।
राजभवन में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात कर अनूप नारायण सिंह ने इस मानवीय पहल के लिए उन्हें छपरा की जनता की ओर से, विशेष रूप से भोजपुरी भाषा-भाषी समाज की तरफ से बधाई और आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा और संस्कृति के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देगा।
राज्यपाल के इस निर्णय के बाद भोजपुरी समाज, साहित्यकारों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है और इसे भिखारी ठाकुर की विरासत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में देखा जा रहा है।
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