धुताहा मठ की ज़मीन बचाने की कीमत: पुजारी पर जानलेवा हमला, पीड़ित ही बना आरोपी

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पश्चिम चंपारण जिले के कंगली थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित धुताहा मठ की बहुमूल्य, प्राचीन और धार्मिक महत्व की भूमि को कथित तौर पर अवैध रूप से बेचने का विरोध करना मठ के पुजारी व्यास तिवारी को भारी पड़ गया। आरोप है कि भूमि माफियाओं और प्रभावशाली लोगों ने साजिश रचकर न केवल पुजारी पर जानलेवा हमला किया, बल्कि बाद में पीड़ित को ही झूठे मुकदमे में फँसा दिया गया।

दीप उत्सव की तैयारी के दौरान हमला

घटना 22 जनवरी 2026 की है। सुबह लगभग 11 बजे पुजारी व्यास तिवारी मठ परिसर में दीप उत्सव कार्यक्रम की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पूर्व नियोजित साजिश के तहत अनिल पांडेय, काशी पटेल, थाना चौकीदार उमेश यादव, मनोज पटेल, राम भूषण पटेल, जन्मजय पांडेय समेत कई अज्ञात लोगों ने एकजुट होकर उन पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुजारी को बेरहमी से पीटा गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना का वीडियो साक्ष्य भी मौजूद है, जिसमें हमलावरों को साफ-साफ देखा जा सकता है।

पीड़ित बना आरोपी, पुलिस पर गंभीर सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हमले के बाद थाना चौकीदार उमेश यादव पर अपने पद का दुरुपयोग कर हमलावरों को बचाने और पुलिस को गुमराह करने का आरोप लगा है। नतीजा यह हुआ कि कंगली थाना में कांड संख्या 10/26 के तहत पुजारी व्यास तिवारी सहित पाँच गरीब और निर्दोष लोगों के खिलाफ फर्जी प्राथमिकी दर्ज कर दी गई।इस पूरे प्रकरण ने पुलिस की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

पहले भी दी थी चेतावनी, नहीं हुई कार्रवाई

पीड़ित पुजारी का कहना है कि इससे पहले भी उन्हें कई बार धमकाया गया। इस संबंध में उन्होंने नरकटियागंज अनुमंडल पदाधिकारी को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन प्रभावशाली लोगों के दबाव में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

धार्मिक भूमि पर माफियाओं की नजर

स्थानीय लोगों के अनुसार धुताहा मठ की भूमि वर्षों से धार्मिक आस्था और सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी है। इसे निजी स्वार्थ में बेचने की कोशिशें लगातार हो रही हैं। जो भी इसका विरोध करता है, उसे डराया-धमकाया जाता है।

न्याय और सुरक्षा की माँग

पुजारी व्यास तिवारी ने पुलिस अधीक्षक पश्चिम चंपारण, जिलाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी नरकटियागंज तथा बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग से मांग की है कि—पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए,वीडियो साक्ष्य के आधार पर असल दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो,फर्जी कांड संख्या 10/26 से निर्दोषों को राहत मिले
पद का दुरुपयोग करने वाले कर्मियों पर कार्रवाई हो,मठ और पुजारी को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए।

सबसे बड़ा सवाल

यह मामला केवल एक पुजारी पर हमले का नहीं, बल्कि धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा, पुलिस की भूमिका और आम नागरिक के अधिकारों से जुड़ा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में कब और कैसे न्याय सुनिश्चित करता है।

क्या कहते हैं धुतहा मठ के पुजारी व्यास तिवारी ( पीड़ित )

धुताहा मठ के पुजारी व्यास तिवारी ने बताया,“इस पूरी घटना में थाना चौकीदार उमेश यादव और मनोज कुमार की मुख्य भूमिका है। इनके साथ अन्य कई लोग भी शामिल हैं, जो मठ की संपत्ति को बेचकर बर्बाद करने पर लगे हुए हैं। पूर्व में भी मठ की जमीन बेची जा चुकी है। हम लगातार इसका विरोध कर रहे हैं, इसी कारण हमें निशाना बनाया गया। उन्होंने आगे कहा,हमारे ऊपर फर्जी एफआईआर दर्ज कर दी गई है। हमें भय है कि हमारे साथ कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। प्रशासन से मांग है कि इस पूरे मामले और हमारे खिलाफ दर्ज एफआईआर की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

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