बिहार में औद्योगीकरण और नियोजन अधर में –डॉक्टर शंभू नाथ सीकरीया

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अशोक वर्मा

मोतिहारी : बिहार के जाने माने उद्योगपति एवं शिक्षाविद डॉक्टर शंभू नाथ सिकरिया जो सामाजिक क्षेत्र में सरोकार रखते हैं ,ने बिहार के औद्योगिक नीति को खोखला बताते हुए कहा कि भले चुनावी महासंग्राम में बिहार की वर्तमान  सरकार सफल रही है और जनता के लिए की गई घोषणा को जमीन पर उतारने की  अपनी प्रतिबद्धता को दोहरा रही है लेकिन सफलता से कोसो दूर है।सरकार  उद्योग एवं रोजगार सृजन हेतु नित्य  घोषणाएं कर  रही है,लेकिन परिणाम  ढाक के तीन पात ही है।सरकार प्रयास तो बहुत कर रही है परंतु नीतियां व्यवहार संगत नहीं है। असफलता का मुख्य कारण यह है कि कार्यपालिका और  विधायिका के लोगों में जानकारी का अभाव होना है। सरकार रुपया अनुदान देकर एक तरफ  एथेनॉल लगा रही है दूसरी ओर कार्यरत एथेनॉल प्लॉट सरकारी नीति अनुकूल नहीं होने के कारण कच्चा और तैयार माल के चक्कर में कर्मियों को 6 -7 माह के लिए हटाकर उत्पादन बंद किया जा रहा हैं। उसमें कार्यरत मजदूर सड़क पर आ जा रहे हैं। 12 माह में सिर्फ 6 माह ही उसे चलाने की प्रक्रिया चल रही है ।इसके अलावा जो भी योजनाएं आज अखबारों की सुर्खियां बन रही है वह धरातल पर नहीं उतर रही है परिणाम  स्वरूप  जनता में सरकार के प्रति विश्वसनीयता की कमी होती जा रही है ।सरकार ने बंद चीनी मिल चालू करने के साथ-साथ नए मिल स्थापना की घोषणा की है लेकिन मोतिहारी के बंद चीनी मिल पर कोई भी विचार नहीं हुआ है। जबकि  मोतिहारी ,चनपटिया और चकिया चीनी मिल तकनीकी एवं कानूनी रूप से कही भी फंसी हुई नहीं है।सिर्फ फंसने का दुष्प्रचार है।  उसके लिए समाधान यह है कि  अगर जिला प्रशासन और सरकार प्रयास करें तो इसे चालू किया जा सकता है। सर्वप्रथम सरकार को यह कराना चाहिए कि बंद चीनी मिल, अशोक पेपर मिल ,रामेश्वर जूट मिल अलामिया नगर फैक्ट्री जो बंद है उन सब में पहले साफ सफाई हो,उसे पेड काता जाय  एवं प्रशासनिक पहल  कर मरम्मत और स्क्रिप्ट को वहां से बिक्री कर हटाया जाना चाहिए और मिल को चालू करने की प्रक्रिया आरंभ करना चाहिए ताकि लोगों में विश्वास उत्पन्न हो। सिर्फ सस्ती लोकप्रियता के लिए घोषणा कर देना काफी नहीं है अब जनता घोषणा नहीं वह काम देखना चाहती है वह भी जमीन पर ।

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