Live News 24×7 के लिए नरेंद्र झा।
मोतिहारी। पीएम पोषण योजना के अधीन आपूर्तिकर्ता (वेंडर) की नियुक्ति में भयंकर गोलमाल किए जाने का मामला एंटी करप्शन फाउंडेशन ऑफ बिहार के निदेशक कैलाश प्रसाद गुप्ता ने उजागर करते हुए शिक्षा विभाग के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी पीएम पोषण योजना को पत्र लिखा है।
पत्र में बताया गया है कि आपूर्तिकर्ता (वेंडर) बहाल करने में विभाग के निर्धारित मानदंड एवं नियमों की घोर अवहेलना की गई है। जिन्हें आपूर्तिकर्ता बनाना है उनकी अपनी निबंधित प्रतिष्ठान होनी चाहिए साथ ही वे उसी पोषण क्षेत्र के भी हों साथ ही मापतौल व Fssai लाइसेंस तथा GST व आयकर आदि अपडेट होना अनिवार्य है, लेकिन जिले के लगभग सभी वेंडरों के द्वारा ऐसा नहीं किया गया है।
बताते हैं कि प्रखंड साधनसेवी एवं संबंधित प्रधान शिक्षक की मिली भगत से नियम विरूद्ध वेंडर बहाल कर दिए गए हैं जिनकी कहीं कोई स्थाई दुकान नहीं है, तो वहीं किसी-किसी शिक्षकों के द्वारा अपने सगे-संबंधी, अपनी पत्नी-भाई, चाचा, बहनोई तथा विद्यालय के रसोइया तक के नाम पर तथाकथित फर्म का सृजन कर बेरोक-टोक आपूर्ति का संचालन करने की बात भी प्रकाश में आई है।
वहीं श्री गुप्ता के आवेदन के आलोक में डीपीओ पीएम पोषण योजना ने प्रधानाध्यापक जगीरहां कन्या प्रखंड बनकटवा से स्पष्टीकरण मांगी थी परंतु वह सन्तोषजनक नही है।
कहा गया है कि आपके यहां पीएम पोषण योजना के तहत् कार्यरत वेंडर नियमानुसार बहाल नहीं है। आपके द्वारा दिया गया जबाव प्रथम दृष्टया संतोषजनक नहीं है।
इस बाबत डीपीओ ने पुनः 24 घंटे के अंदर साक्ष्य सहित जबाव की मांग की है साथ ही कहा है कि जबाव संतोषजनक नहीं होने पर आपके विरुद्ध उच्चाधिकारियों को कार्रवाई हेतु लिखा जाएगा।
इसी तरह पीएम पोषण योजना के तहत् नियुक्त वेंडर के संबंध में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय हरपुर प्रखंड आदापुर के शिक्षक विनोद कुमार के द्वारा पूर्व में अपनी पत्नी पुष्पा देवी तथा वर्तमान में अपने ही विद्यालय के रसोइया शिला देवी के नाम पर सृजन फर्म SD इंटरप्राइजेज जो इनके बहनोई प्रेम शंकर कुमार के नाम से संचालित है जिसके सबधित कागजातों में अलग अलग जगहों का पता अंकित है आदि के संबंध में भी श्री गुप्ता के द्वारा शिकायत पत्र दी गई है।
मिली शिकायत पत्र के आधार पर डीपीओ प्रह्लाद गुप्ता पीएम पोषण योजना ने शिक्षक विनोद कुमार से भी स्पष्टीकरण की मांग 24 घंटे के भीतर की है।
बताया जा रहा है इन दोनों प्रखंडों में वेंडर नियुक्ति में फर्जीवाड़ा किया गया है यह प्रथम दृष्टया सही दिखाई दे रहा है। विभाग के वरीय अधिकारी को इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करने की जरूरत है।
यह भी आशंका जताया जा रहा है कि जिले के लगभग सभी पोषण क्षेत्रों में ऐसे ही फर्जीवाड़ा कर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है और काली कमाई की जा रही है।
बहरहाल, केवल हिदायत नहीं बल्कि इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए ताकि यह गोरखधंधा बंद हो सके।
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