परिवार नियोजन कार्यक्रम एवं सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा कार्यक्रम पर आयोजित हुई जिला स्तरीय बैठक

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बाल मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयासों में तेजी लाने की आवश्यकता है- सीएस
स्वास्थ्य कर्मी जागरूकता पर दें जोर 
बेतिया। परिवार नियोजन कार्यक्रम एवं सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा कार्यक्रम पर बेतिया के हरवाटिका चौक स्थित एक निजी होटल में सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार के अध्यक्षता में जिले के स्वास्थ्य कर्मियों व अधिकारियों की समीक्षात्मक बैठक आयोजित हुई। जिसमें सीएस ने कहा की बाल मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयासों में तेजी लाने की आवश्यकता है, उन्होंने कहा की राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आंकड़ों के अनुसार पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में 13 प्रतिशत की मौत डायरिया के कारण होती है तथा इनमें से अधिकांश मौतें ग्रीष्म और मानसून के मौसम में होती हैं। इसे देखते हुए जिले में  सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है। इसके बारे में आमजनों को अधिक से अधिक जागरूक करने की आवश्यकता है।
समीक्षात्मक बैठक मे स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा, जीविका, आईसीडीएस व अन्य विभागों के प्रतिनिधि मौजूद थे। उन्होंने कहा की पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के बीच में एक- एक ओआरएस पैकेट का वितरण किया जाए। वहीं अगर बच्चा दस्त से पीड़ित पाया जाता है तो उन बच्चों को जिंक की 14 गोली और दो ओआरएस पैकेट आशा उपलब्ध कराए। इस दौरान परिवार नियोजन के स्थायी अ स्थायी संसाधनों के अधिक प्रयोग कर जनसंख्या पर नियंत्रण की बातें बताई गईं। डीसीएम राजेश कुमार ने कहा की पूरे बिहार में सबसे ज्यादा परिवार नियोजन व विधियों का प्रयोग पश्चिमी चम्पारण जिले में हुआ है। उन्होंने बताया की एप्प के माध्यम सभी पदाधिकारी स्वास्थ्य कर्मियों के कार्यों का अनुश्रवन करना सुनिश्चित करेंगे। डीसीएम राजेश कुमार ने कहा की डायरिया से बच्चों को बचाव, रोकथाम एवं उपचार हेतु संस्थान एवं समुदाय स्तर पर जनजागरूकता से संबंधित कई अहम गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। प्रचार हेतु सारथी रथ भी घूम रहा है। उन्होंने बताया की 5 वर्ष तक के बच्चों के बीच 10 लाख ओआरएस, 99 लाख जिंक की दवाए वितरित की जाएगी। उन्होंने कहा की डायरिया बाल मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। उन्होंने बताया की 17 जुलाई कों दस्त नियंत्रण पखवाड़ा एवं परिवार नियोजन पखवाड़ा पर बैठक होगी।
दूषित पानी या खाद्य पदार्थों के सेवन से होता है डायरिया:
एसीएमओ डॉ रमेश चंद्र ने कहा की  डायरिया एक संक्रामक बीमारी है जो गंदे हाथों से भोजन करने व अ स्वच्छ जल पीने के कारण होता है। इसीलिए डायरिया के प्रसार को रोकने के लिए हमें खुले में शौच से परहेज एवं शौच के बाद व खाने से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना बहुत आवश्यक है। साथ ही हमें दूषित पेयजल एवं खाद्य पदार्थों के सेवन से भी परहेज करना चाहिए।  उन्होंने बताया की डायरिया पर नियंत्रण के लिए 6 माह तक शिशु को केवल स्तनपान, पर्याप्त पूरक आहार और विटामिन-ए देने की आवश्यकता है। उन्होंने रोटा वायरस के टीकाकरण को भी महत्वपूर्ण बताया, उन्होंने कहा की यदि बच्चे को डायरिया हो जाए तो जिंक-ओआरएस का प्रयोग असरकारी होता है। डायरिया के गंभीर मामलों के अस्पताल में उपचार की भी विशेष व्यवस्था होती है जहाँ इसके लिए विशेष वार्ड बनाए गए हैं।
मौके पर सीएस, एसीएमओ, डीसीएम, पीएसआई डीसी व अन्य अधिकारी व स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थें।
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