घर-घर कालाजार रोगियों की होगी खोज,चलेगा अभियान

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  •  15 मई तक तैयार होगा माइक्रोप्लान 
  • आशा कार्यकर्ता प्रतिदिन 50 घरों में करेंगी कालाजार रोगियों की खोज 
शिवहर ।कालाजार संक्रमण की स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए जिले में कालाजार रोगियों की घर-घर खोज होगी। इसके लिए 15 मई तक माइक्रो प्लान तैयार कर लिया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ दीपक कुमार ने कहा कि कालाजार जानलेवा बीमारी है। कालाजार पर नियंत्रण व इस बीमारी के नए रोगियों की खोज के लिए घर-घर कालाजार रोगियों की खोज की जाएगी। यह खोज उन कालाजार प्रभावित गांवों में होगी जहां पिछले 3 सालों में कोई कालाजार का मरीज नहीं प्रतिवेदित हुआ हो। वर्ष में दो बार कीटनाशक का छिड़काव कराया जाता है। वहीं जिला भीबीडीसी डॉ सुरेश राम ने बताया कि कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है, जो संक्रमित मादा बालू मक्खी के काटने से होती है। जिले में आशा कार्यकर्ता एक दिन में अधिकतम 50 घर जाकर कालाजार के मरीजों को खोजेंगी।
वहीं हैवतनगर एवं सलेमपुर में कालाजार के वेक्टर (वाहक) सैंड फ्लाई (बालू मक्खी) के वेक्टर डेंसिटी का आंकलन किया गया। ताकि कालाजार के निरोधात्मक उपायों के निमित्त आवश्यक गतिविधियों की रूपरेखा बनाई जा सके। जिला वेक्टर जनित रोग कंसल्टेंट सह कीट विज्ञानी मोहन कुमार, एपिडेमियोलॉजीस्ट डॉ राहुल एवं भीबीडीएस बृज किशोर गुप्ता द्वारा घरों के अंदर बालू मक्खी जांच की गई।
ज्ञात हो कि कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है जो संक्रमित मादा बालू मक्खी के काटने से होती है। कालाजार का इलाज समय पर नहीं हो तो यह जानलेवा हो सकता है। सभी सरकारी अस्पताल में मुफ्त जांच एवं उपचार की सुविधा निःशुल्क है। कालाजार प्रभावित ग्रामों में (जहां पिछले 3 वर्षों में कोई मरीज प्रतिवेदित हो), वर्ष में दो बार कीटनाशक का छिड़काव (आई आर एस) कराया जाता है।
कालाजार के लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक समय से बुखार, भूख न लगना, कमजोरी, प्लीहा (स्प्लीन) एवं लीवर बढ़ जाना एवं जोड़ का दर्द शामिल हैं।
कालाजार मरीजों को इलाज के उपरांत मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना अंतर्गत 66 सौ रुपए एवं भारत सरकार से 500 रुपए सहित कुल 7100 रुपए दिए जाते हैं।
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