- अररिया बंध्याकरण में लक्ष्य का 88 प्रतिशत किया हासिल
- आरओपी इंडिकेटर परिवार नियोजन सेवाओं की निगरानी और मूल्यांकन के लिए किए जाते हैं उपयोग
पटना। राज्य में परिवार नियोजन सेवाओं के इस्तेमाल और सतत निगरानी के लिए आरओपी इंडिकेटर का इस्तेमाल हो रहा है। ये संकेतक बताते हैं कि परिवार नियोजन कार्यक्रमों ने कितनी सफलता हासिल की है। इसी के तर्ज पर राज्य ने परिवार नियोजन के तहत चार आरओपी इंडिकेटर में जिलों की रैंकिंग जारी की है। इसमें अररिया प्रथम,खगड़िया दूसरे तथा मुंगेर ने तीसरा स्थान हासिल किया है। यह रैंकिंग वर्ष 2024-25 के लिए जारी की गयी है। जिन चार सेवाओं को इस आरओपी इंडिकेटर में शामिल किया गया है। इनमें बंध्याकरण, प्रसव उपरांत कॉपर टी का उपयोग, अंतरा सूई और एफपीएलएमआईएस का क्रियान्वयन शामिल है। मालूम हो कि राज्य में वर्ष 2024- 25 के दौरान करीब 7 लाख अंतरा सुई तथा 3.5 लाख कॉपर टी का इस्तेमाल लाभार्थियों के द्वारा किया गया है।
आरओपी इंडिकेटर के संबंध में पटना एम्स की एडिशनल प्रोफेसर डॉ इंदिरा प्रसाद बताती हैं कि परिवार नियोजन के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल बंध्याकरण,कॉपर टी और अंतरा का ही होता है। परिवार नियोजन में आरओपी इंडिकेटर बताते हैं कि परिवार नियोजन कार्यक्रमों ने क्या किया है। इसके साथ ही यह परिवार नियोजन सेवाओं की गुणवत्ता प्रक्रिया के संकेतक भी होते हैं। इससे परिवार नियोजन कार्यक्रम में सुधार भी लाया जा सकता है।
83 प्रतिशत फैसिलिटी करते हैं परिवार नियोजन की नियमित रिपोर्टिंग
राज्य में आरओपी इंडिकेटर के तहत एफपीएलएमआईएस भी शामिल है। राज्य की 83 फीसदी फैसिलिटी एफपीएलएमआईएस पर परिवार नियोजन के तहत दी जाने वाली सेवाओं की नियमित रिपोर्टिंग होती है। एफपीएलएमआईएस पर 100 प्रतिशत नियमित रिपोर्टिंग कर अररिया प्रथम तथा 99 प्रतिशत के साथ नालंदा दूसरे स्थान पर है।
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