5 मई 1950 को ईश्वरीय निर्देश से ब्रह्माकुमारी संस्था कराची पाकिस्तान से भारत  के माउंट आबू आई

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अशोक वर्मा 
मोतिहारी :     1936 में तत्कालीन संयुक्त भारत के कराची में स्थापित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय संस्था  1950 तक कराची में  सेवारत रही। देश  विभाजन का कोई भी प्रभाव इस संस्था पर  नहीं पड़ा। वहां के प्रशासन से लेकर  जनता का सहयोग और प्यार मिला। देश विभाजन के बाद ईश्वरीय आदेशानुसार वहां से  यह संस्था भारत के माउंट आबू  आई और उसके बाद से यहा सेवारत है। जन्म मरण के चक्कर में आने से कला विहीन हो चुकी आत्माओं को सशक्त करने का कार्य भारत में आने के बाद काफी बढी और  संस्था का विस्तार विश्व के 140 देशो में हुआ।मूल्यों को पुनर्स्थापित करने के साथ चरित्र निर्माण की दिशा में संस्था कार्य कर रही है। संस्था का मुख्य स्लोगन पवित्र बनो और योगी बनो है। अपनी विशेष सेवा और  समर्पण भाव युक्त  शैली से भारत के आध्यात्मिक ज्ञान से यह संस्था पूरे विश्व में एक बार पूनः शीर्ष पर है। संस्था में आज 60,000 समर्पित बहन भाई हैं तथा लाखों भाई  बहन और माता इस महाविद्यालय के रेगुलर स्टूडेंट है।सभी योग अभ्यास के साथ-साथ ईश्वरीय पढ़ाई पढ़ रहे हैं। सभी  प्रभागो के माध्यम से पूरे विश्व मे आध्यात्मिक सशक्तिकरण का कार्य संस्था  कर रही है जो अपने आप में अजूबा है । वर्तमान मूल्य  ह्रास के दौर में संस्था दिनों दिन मूल्यो को स्थापित करने में काफी सफलता प्राप्त कर रही है ।संस्था के सुझाव पर केन्द्र सरकार द्वारा देश मे योग दिवस,व्यसनमुक्ति और स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है।संस्था की अंतरराष्ट्रीय  हेड रही अव्यक्त जानकी दादी जी स्वच्छता अभियान की ब्रांड  अंबेसडर रह चुकी है।
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