- नई दिल्ली के भारत मंडपम में 21 से 31 जुलाई तक संपन्न समारोह का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।
- वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी की अंतरराष्ट्रीय स्तर की बैठक में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत व ऐतिहासिक धरोहरों से दुनिया रु- ब- रु हुई।
- पूरी धरती हमारी माँ, पुरातन दृष्टिकोण से पूरा विश्व एक है – डाॅ. नूतन
अशोक वर्मा
मोतिहारी : अपनी विशिष्ट कलात्मक उपलब्धियों से विश्वक्षितिज पर भारत का नाम रौशन कर रहीं राष्ट्रपति अवार्ड से विभूषित देश की अमूल्य कला- धरोहर व चंपारण की बेटी डाॅ. नीतू कुमारी नूतन ने भारत में पहली बार आयोजित 46 वें यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी की बैठक में भाग लेकर बिहार एवं भारत का मानवर्धन किया है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्त्वावधान में नई दिल्ली के भारत मंडपम में दिनांक 21 से 31 जुलाई तक संपन्न अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी की बैठक की मेजबानी पहली बार भारत कर रहा है, जिसका उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। समारोह के उद्घाटन के अवसर पर यूनेस्को की डायरेक्टर जेनेरल आंद्रे अजोले, भारत सरकार के मंत्रीगण, यूनेस्को के उच्चाधिकारीगण, राजदूत, पुरातत्त्व विशेषज्ञ तथा गणमान्य हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस बैठक में 192 देशों के करीब दो हजार की संख्या में आये राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
डाॅ.नूतन को केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय ने आमंत्रणपत्र भेजकर वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी की इस अतिमहत्त्वपूर्ण बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।
वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी की इस बैठक में खासतौर पर दुनियाभर के देशों की ऐतिहासिक धरोहर, कला-विरासत एवं संस्कृति से जुड़ी प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें दुनिया भर के पुरातत्त्व की मूर्तियों एवं कलाकृतियाँ प्रदर्शन के लिए लगाई गईं हैं।
इस आयोजन के माध्यम से दुनिया को भारत की समृद्ध विरासत एवं प्राचीन संस्कृति के महत्त्व व प्राचीन भारत के वैज्ञानिकों, कलाकर्मियों की सोच एवं क्षमता से रु- ब- रु होने का सुनहरा अवसर मिलेगा।
डाॅ.नूतन ने कहा कि वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी की अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस बैठक के माध्यम से पूरी दुनिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली इतिहास से जुड़ी धरोहर-विरासत को एक साथ जानने, देखने एवं समझने का उन्हें सुनहरा अवसर मिला, जिसकी अनुभूतियों को शब्दों में बयाँ करना मुमकिन नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस आयोजन में लगी प्रदर्शनी में दुनिया के कई देशों की दुर्लभ मूर्तियाँ, विरासत व इतिहास से जुड़ी पौराणिक व आधुनिक कलाकृतियों के प्रदर्शन को देख उन्हें कई नये अनुभव हुए। वही, भारत के सभी राज्यों की संस्कृति एवं कला-धरोहरों का यहाँ प्रदर्शन कर भारत की गरिमामयी सांस्कृतिक विरासत से दुनिया का परिचय कराया गया।
डाॅ.नूतन ने कहा कि वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी की इस बैठक में दुनिया की विरासत- धरोहर व कई कलात्मक मूर्तियों को देखने से लगा कि उनकी झलक हमारे मंदिरो की कलाकृतियों तथा हमारी कलाओं में समान रूप से देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि दुनिया की समस्त विरासत- धरोहर व कलाकृतियों के अवलोकन के पश्चात हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि पूरी दुनिया एक समान है और पुरातन दृष्टिकोण से पूरा विश्व एक है। पूरी धरती हमारी माँ समान है और दुनियाभर के लोग उसकी संतानें हैं, जिनकी भाषा, रहन-सहन, रीति-रिवाज अलग- अलग तो जरुर है, परन्तु विश्व की संस्कृति, सभ्यता- धरोहर, पर्वत, झील-पत्थर व समुद्र के रूप एक समान ही हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी की बैठक में विशेषज्ञों द्वारा सुझाव माँगे जाने पर डाॅ. नूतन ने कहा कि भारत एवं दुनिया के संग्रहालयों में मौजूद पुरातन वाद्य- वादन ( मेलोडियस इंस्ट्रूमेंट्स) के पौराणिक स्वरुप को सँवारने, सहेजने के साथ ही उन्हें जीवंत कर संरक्षित करने की आवश्यकता है। मसलन- भारत के समस्त प्रकशन यथा- झाल, थाल, चम्मच, कटोरा तथा पौराणिक तार व ताल- वाद्ययंत्र आदि की हिफाजत की पुरजोर आवश्यकता है।
डाॅ. नूतन ने कहा कि निश्चित तौर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी की इस विश्वस्तरीय बैठक में भारत ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत,गौरवशाली इतिहास से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण- संवर्धन की दिशा में अपने प्रयासों को विश्व-पटल पर दर्शाने में कामयाब रहा है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से दुनियाभर में संदेश गया कि भारत दुनिया के सभी देशों की विरासत- धरोहर व आधुनिक सोच को साथ लेकर चलने के प्रति कृतसंकल्पित है।
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