• बिदुलिया में सीएचओ लीड रोगी हितधारक मंच और समुदाय के साथ हुई बैठक
• स्तनपान के मिथक टूटे, महिलाओं के खान-पान और साफ-सफाई में दिखा व्यापक सुधार
वैशाली। ग्रामीण अंचलों में जहाँ अक्सर पुरानी रूढ़ियां और भ्रम हावी रहते हैं, वहीं बिदुलिया गाँव से एक बेहद सुखद और सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। यहाँ घर की बुजुर्ग महिलाएं यानी ‘सास’ खुद अपनी बहुओं को स्तनपान के फायदे बता रही हैं और उन्हें इसके प्रति जागरूक कर रही हैं। बदलाव की यह शानदार बयार इन दिनों मनाए जा रहे विश्व स्तनपान सप्ताह (01 से 08 अगस्त) के अवसर पर आयोजित एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य बैठक में देखने को मिली।
बिदुलिया गाँव में सीएचओ लीड रोगी हितधारक मंच और समुदाय के विभिन्न वर्गों की मौजूदगी में आयोजित इस परिचर्चा में खुशबू कुमारी, कोमल कुमारी,प्रियंका ने स्तनपान से जुड़े मिथक, उत्तम आदतों और पोषण के अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की । बैठक में जो बातें सामने आईं, वे महिला स्वास्थ्य और जागरूकता के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि हैं।
रूढ़ियां टूटीं, सास बनीं प्रेरक:
इस बैठक का सबसे खास पहलू पारिवारिक सहयोग का रहा। परिचर्चा में शामिल शकुंतला देवी ने साझा किया कि अब परिवारों में सास की भूमिका पूरी तरह से बदल रही है। वे न केवल पुरानी मान्यताओं और मिथकों को पीछे छोड़ रही हैं, बल्कि स्तनपान के वैज्ञानिक फायदों को समझकर शिशु के पालन-पोषण में अपनी बहुओं का पूरा साथ दे रही हैं।
इस मौके पर सीएचओ लीड रोगी हितधारक मंच के प्रतिनिधियों ने महिलाओं और उनके परिवारों की इस जागरूकता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि स्तनपान सप्ताह का मुख्य उद्देश्य यही है कि समाज में स्तनपान को लेकर फैले भ्रम दूर हों और छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही मिले। बिदुलिया गाँव की महिलाओं और विशेषकर बुजुर्ग माताओं ने इस दिशा में एक बेहतरीन मिसाल पेश की है, जो अन्य गांवों के लिए भी अनुकरणीय है।
साफ-सफाई और सही तरीके पर विशेष ध्यान:
चर्चा के दौरान एएनएम पुष्पा कुमारी ने बताया कि क्षेत्र की महिलाएं अब अपने और अपने शिशु के स्वास्थ्य को लेकर काफी सजग हो गई हैं। धात्री (स्तनपान कराने वाली) महिलाएं व्यक्तिगत साफ-सफाई का पूरा ध्यान रख रही हैं। इसके साथ ही, बच्चों को दूध पिलाते समय हमेशा ‘बैठकर ही स्तनपान कराने’ की सही विधि का पालन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बैठकर दूध पिलाना शिशु को फंदा लगने से बचाने और दूध पीने की सही पकड़ बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
थाली में शामिल हुई दाल और हरी सब्जियां:
शिशु के बेहतर विकास के लिए मां का स्वस्थ रहना भी उतना ही आवश्यक है। बैठक में स्तनपान कराने वाली माता कोमल ने बताया कि वे अब अपने पोषण को लेकर भी गंभीर हैं। माताओं के दैनिक आहार में दाल और हरी सब्जियों का भरपूर सेवन किया जा रहा है, जिससे उन्हें और उनके शिशु को पर्याप्त पोषक तत्व और लौह तत्व मिल रहे हैं। मौके पर रोगी हितधारक मंच के सीएचओ मुकेश चाहर,आशा रीना देवी, आंगनबाड़ी सेविका रूबी देवी,सहायिका रेखा देवी, वार्ड पार्षद अभिषेक कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
36