नवजातों को दूध पिलाने के लिए दिहाड़ी छोड़ रहीं माताएं, हर दो घंटे पर खेत से लौटकर करा रहीं स्तनपान

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मुजफ्फरपुर। ​मुजफ्फरपुर जिले में नवजातों के स्वास्थ्य और पोषण के प्रति एक सुखद और बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिल रहा है। पूरे जिले में दिहाड़ी मजदूरी करने वाली महिलाएं अब अपने बच्चों को नियमित स्तनपान कराने के लिए अपनी मजदूरी तक से समझौता कर रही हैं। जिले के बोचहां प्रखंड की रहने वाली पूजा और रीता देवी जैसी दिहाड़ी मजदूर महिलाएं पूरे समाज के लिए एक नई नजीर पेश कर रही हैं।

इन महिलाओं ने बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती तीन महीने तक खेतों में काम करना पूरी तरह से बंद कर दिया, ताकि उनके नवजात को समय पर मां का दूध मिल सके। इतना ही नहीं, इसके बाद के तीन महीनों में भी वे हर दो घंटे पर खेत से काम छोड़कर घर लौटती हैं और बच्चे को स्तनपान कराती हैं।

​पूरे जिले में आ रहे इस सकारात्मक बदलाव की स्पष्ट झलक हाल ही में बोचहां के सरफुद्दीनपुर पंचायत अंतर्गत सलहा ग्राम में रोगी हितधारक मंच और ‘रानी एवं लक्ष्मी जीविका ग्राम संगठन’ के तत्वावधान में आयोजित एक विशेष सामुदायिक बैठक के दौरान सामने आई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पूरे समुदाय की महिलाओं में स्तनपान को लेकर जागरूकता बढ़ाना, समाज में अपनाई जा रही ‘गुड प्रैक्टिसेज’ (अच्छी आदतों) को जानना और पुरानी भ्रांतियों को दूर करना था।

​सामने आईं समुदाय की अच्छी आदतें, रोने का नहीं करतीं इंतजार:

जिले भर में चल रही जागरूकता का ही असर है कि महिलाएं अब बच्चे के रोने का इंतजार नहीं करतीं, बल्कि हर डेढ़ से दो घंटे के नियमित अंतराल पर खुद ही स्तनपान कराती हैं। महिलाएं स्तनपान से पहले व्यक्तिगत स्वच्छता का भी पूरा ध्यान रख रही हैं। स्तनपान से पहले बच्चे का मुंह और अपना स्तन साफ कपड़े से पोंछना, पैदा होते ही छाती धोकर पहला दूध पिलाना, तंबाकू से पूरी तरह परहेज करना और पोषणयुक्त आहार लेना जैसी अच्छी आदतें अब महिलाओं की दिनचर्या में शामिल हो चुकी हैं। दूध तब तक पिलाया जाता है, जब तक बच्चा खुद पीना न छोड़ दे।

​प्राकृतिक गर्भनिरोधक का भी काम करता है स्तनपान:
सीएचओ पूजा रानी ने बैठक में बताया कि स्तनपान एक प्राकृतिक और अस्थायी गर्भनिरोधक का भी काम करता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ‘एलएएम’ कहा जाता है। उन्होंने बताया कि मां का दूध नवजातों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है, जो उन्हें कई बीमारियों से बचाता है। नियमित स्तनपान से महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा भी कम होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छोटी-मोटी बीमारियों में मां को स्तनपान जारी रखना चाहिए। केवल एचआईवी और हेपेटाइटिस से पीड़ित होने पर ही स्तनपान वर्जित है।

​एएनएम ने बताया दूध पिलाने का सही तरीका:
एएनएम मधु कुमारी ने महिलाओं को बच्चे को सही ढंग से गोद में लेकर स्तनपान कराने की वैज्ञानिक विधि बताई। उन्होंने बताया कि बच्चा स्वस्थ तरीके से दूध पी रहा है या नहीं, इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे- बच्चे का मुंह पूरी तरह से खुला हो, उसकी ठुड्डी मां के स्तन से सटी हो, मां के स्तन (एरिओला) का ऊपरी भाग नीचे वाले भाग से ज्यादा दिखे और दूध पीते समय बच्चे के गले से गट-गट की आवाज आए।

​विशेषज्ञों ने तथ्यों के साथ दूर कीं भ्रांतियां:
बैठक के दौरान महिलाओं के बीच फैले कई मिथक भी सामने आए, जिन्हें स्वास्थ्य कर्मियों ने तथ्यों के साथ दूर किया। महिलाओं में यह भ्रांति थी कि नियमित स्तनपान से शारीरिक बनावट खराब हो जाती है, जिसे विशेषज्ञों ने पूरी तरह निराधार बताया। वहीं, लड़के को नियमित दूध पिलाने और लड़की के लिए इसे कम जरूरी मानने वाले गंभीर लिंगभेद को भी सिरे से खारिज किया गया। महिलाओं के मन में यह भी डर था कि छोटी-मोटी बीमारी में दूध पिलाने से बच्चा बीमार पड़ जाएगा या नॉर्मल डिलीवरी के बाद कमजोर मां के लिए स्तनपान नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों ने इन सभी आशंकाओं को गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि सामान्य बीमारियों में स्तनपान पूरी तरह सुरक्षित है। इसके अलावा, सिजेरियन ऑपरेशन के बाद दूध कम बनने जैसी गलत धारणाओं को भी दूर करते हुए सभी माताओं को बिना किसी डर के स्तनपान कराने के लिए प्रेरित किया गया।

​64 महिलाओं ने लिया हिस्सा:
इस सामुदायिक बैठक में 64 महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) पूजा रानी, एएनएम मधु कुमारी, जीविका सीएम सरिता देवी, एमएनएस एमआरपी जीविका कंचन कला और पंचायत समिति व रोगी हितधारक मंच की सदस्य मीणा देवी ने महिलाओं को संबोधित किया और उन्हें स्तनपान के फायदों के बारे में विस्तार से बताया।

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