- मुस्तफापुर विद्यालय में बच्चियों की गंभीर घटनाओं के बाद पोषक क्षेत्र के बच्चों की हुई स्वास्थ्य जांच
हाजीपुर। विद्यालय में एक बच्ची के बार-बार बेहोश होने और दूसरी बच्ची की मस्तिष्क में गांठ के कारण मौत की घटना ने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर बिदुपुर प्रखंड के मुस्तफापुर राजकीय प्राथमिक विद्यालय में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की चलंत चिकित्सक टीम पहुंची। टीम ने बच्चों की ब्लड प्रेशर (बीपी), हीमोग्लोबिन, गंभीर रोगों की स्क्रीनिंग सहित अन्य महत्वपूर्ण जांच की।
विद्यालय की शिक्षिका ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर इन घटनाओं की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि विद्यालय की एक बच्ची प्रार्थना के दौरान, खेलते समय और कक्षा में पढ़ाई करते हुए अचानक बेहोश हो जाती है। बेहोशी के बाद उसकी याददाश्त भी प्रभावित होती है। आवेदन के अनुसार, हाल ही में बेहोश होकर गिरने से बच्ची के सिर में गंभीर चोट आई थी। वहीं, 12 अक्टूबर को कक्षा एक की एक बच्ची की मस्तिष्क में गांठ के कारण मृत्यु हो गई थी। इन घटनाओं से चिंतित शिक्षिका ने विद्यालय के पोषक क्षेत्र के बच्चों की जांच कराने का अनुरोध किया था।
आर्थिक तंगी से इलाज में परेशानी:
शिक्षिका ने आवेदन में बताया था कि बीमार बच्ची के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। परिवार में घरेलू हिंसा की शिकायत का भी उल्लेख किया गया था, जिससे बच्ची के इलाज और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। शिक्षिका के अनुसार, विद्यालय के शिक्षकों ने आपस में आर्थिक सहयोग कर बच्ची के इलाज की शुरुआत कराने में मदद की है, लेकिन आगे के इलाज के लिए अतिरिक्त सहायता की जरूरत है।
उन्होंने जिलाधिकारी से बच्ची को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बीमार बच्चों को निःशुल्क जांच एवं इलाज की सुविधा देने का अनुरोध किया था।
बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति प्रशासन की पहल:
जिलाधिकारी के निर्देश पर मेडिकल टीम का विद्यालय पहुंचना बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान और जरूरत के अनुसार चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में पहल है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए समय पर जांच और उचित इलाज तक पहुंच महत्वपूर्ण है। बच्चों में बार-बार बेहोशी या अन्य असामान्य लक्षण दिखने पर अभिभावकों और शिक्षकों को तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
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