अमित शाह का राहुल गांधी पर बड़ा हमला, बोले- चुनाव आयोग पर ठीकरा फोड़ने के बजाय अपनी लगातार हार का आत्ममंथन करें

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देश की राजधानी नई दिल्ली में सियासी तापमान उस समय तेजी से बढ़ गया जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रियाओं पर उठाए गए तमाम सवालों को सिरे से खारिज करते हुए जोरदार पलटवार किया। अमित शाह ने दो टूक शब्दों में कहा कि राहुल गांधी अपनी पार्टी की लगातार हो रही चुनावी पराजय की कड़वी सच्चाई को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करने का बहाना तलाश रहे हैं। गृह मंत्री ने चुनावी आंकड़ों और हालिया नतीजों का सिलसिलेवार ब्योरा पेश करते हुए कांग्रेस नेतृत्व को आत्ममंथन करने और जनता के जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करने की सख्त राजनीतिक नसीहत दी है।

‘क्या यह भी एसआईआर का नतीजा है?’ अमित शाह ने राहुल गांधी से पूछे तीखे सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हालिया चुनावी परिणामों का हवाला देते हुए राहुल गांधी के आरोपों की हवा निकाल दी। शाह ने कहा कि जब भी भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता जनता के बीच साबित होती है, तो विपक्षी दल अपनी नाकामी छुपाने के लिए कभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन तो कभी विशेष संशोधन प्रक्रियाओं (एसआईआर) का झूठा बहाना बनाकर उसे खारिज करने की नाकाम कोशिश करते हैं। गृह मंत्री ने सवाल दागते हुए कहा कि जिस बड़े राज्य में कभी कांग्रेस का एकछत्र राज हुआ करता था, वहां पार्टी पिछले 41 वर्षों से एक भी चुनाव नहीं जीत सकी है। शाह ने कहा कि राहुल गांधी को निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले अपनी पार्टी की नीति, नीयत और नेतृत्व पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि जब से उन्होंने कांग्रेस की कमान संभाली है, पार्टी लगातार चुनावी पतन की ओर अग्रसर है।

उपचुनावों में कांग्रेस का पूरी तरह सूपड़ा साफ, भाजपा ने दर्ज की रिकॉर्डतोड़ जीत

अमित शाह ने हाल ही में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में संपन्न हुए उपचुनावों के परिणामों का ब्योरा सामने रखते हुए कांग्रेस की जमीनी स्थिति की पोल खोली। उन्होंने बताया कि इन तीनों राज्यों के उपचुनावों में कांग्रेस पार्टी एक भी सीट जीतने में पूरी तरह नाकाम रही। नौगांव में भाजपा प्रत्याशी ने कांग्रेस से सीट छीनते हुए 1,42,000 मतों के भारी अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर भाजपा उम्मीदवार ने 76 प्रतिशत मत हासिल किए और 1,22,000 वोटों की प्रचंड बढ़त बनाई। रेजीनगर सीट पर भी भाजपा ने 75,000 से अधिक मतों के अंतर से तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त दी। वहीं पुडुचेरी में एनडीए गठबंधन के सहयोगी दल एआईएनआरसी ने 8,482 मतों से जीत दर्ज की, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को महज 22 प्रतिशत वोट ही मिल सके।

गुजरात नगर निगम और राजस्थान स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा का एकतरफा परचम

स्थानीय शासन के स्तर पर आए चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि गुजरात की दो नगर पालिकाओं और गांधीनगर नगर निगम के चुनाव परिणामों ने जनता के मिजाज को फिर स्पष्ट कर दिया है। कुल 104 सीटों में से भाजपा ने 90 सीटों पर एकतरफा परचम लहराया, जिसमें उनके संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले गांधीनगर नगर निगम की 44 में से 38 सीटों पर भाजपा को जीत मिली और पार्टी का वोट शेयर 10 प्रतिशत तक बढ़ गया। उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी ने 32 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन सभी सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई। इसके अलावा राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में भी भाजपा ने 90 प्रतिशत नगर निगमों, 66 प्रतिशत नगर परिषदों और 65 प्रतिशत नगर पालिकाओं पर ऐतिहासिक कब्जा जमाया, जहां आम आदमी पार्टी 85 प्रतिशत से ज्यादा वार्डों में अपनी जमानत भी नहीं बचा सकी।

बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी कांग्रेस ध्वस्त, ईवीएम पर उठने वाले तर्कों की निकली हवा

ईवीएम और चुनाव प्रणाली पर विपक्ष के आरोपों की धज्जियां उड़ाते हुए गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि कई स्थानीय और पंचायत चुनाव पूरी तरह से बैलेट पेपर के जरिए संपन्न कराए गए थे। त्रिपुरा के ग्राम समिति चुनावों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एनडीए ने कुल 4,600 सीटों में से लगभग 4,000 सीटों पर जीत हासिल करते हुए 77.5 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया, जबकि कांग्रेस पार्टी महज 14 सीटों पर सिमट कर रह गई। शाह ने कहा कि बैलेट पेपर के इन नतीजों ने उन सभी बेबुनियाद तर्कों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है जो चुनावी हार का ठीकरा मशीनों पर फोड़ते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि त्रिपुरा में पिछले 33 वर्षों से और पश्चिम बंगाल में 54 वर्षों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है। गृह मंत्री ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि जब जनता दशकों से किसी दल को लगातार नकार रही हो, तो संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने के बजाय अपनी गलतियों का ईमानदारी से आत्मचिंतन करना ही एकमात्र रास्ता बचता है।

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