5 राज्यों में बिछेंगी नई रेलवे लाइनें: 14 जिलों की खुलेगी किस्मत, मोदी कैबिनेट ने ₹10,783 करोड़ के 4 बड़े रेल प्रोजेक्ट्स को दी हरी झंडी

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देश के लॉजिस्टिक्स और सार्वजनिक परिवहन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने भारतीय रेलवे की चार प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (4 Major Rail Projects) को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। लगभग ₹10,783 करोड़ की कुल अनुमानित लागत वाली ये परियोजनाएं देश के 5 प्रमुख राज्यों में फैली हुई हैं।

इन परियोजनाओं के जरिए मौजूदा मार्गों पर भीड़भाड़ (कंजेशन) कम करने, मालगाड़ियों की औसत गति बढ़ाने और पिछड़े व जनजातीय इलाकों को मुख्य रेल नेटवर्क से सीधे जोड़ने की तैयारी है। इस फैसले से 5 राज्यों के 14 जिले सीधे लाभान्वित होंगे और करीब 600 किलोमीटर तक नई रेल लाइन बिछाने व दोहरीकरण (Doubling) का काम किया जाएगा।

किन 5 राज्यों और 14 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा?

यह रेल विस्तार योजना मुख्य रूप से देश के मध्य, पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को आपस में जोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई है:

  • शामिल 5 राज्य: उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात।
  • 14 प्रमुख जिले: इन राज्यों के 14 महत्वपूर्ण औद्योगिक, खनन और कृषि बहुल जिलों को इस नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिससे स्थानीय व्यापार, दैनिक यात्रियों और छात्रों को सुरक्षित और तेज यात्रा विकल्प मिलेगा।
  • नए रेलवे स्टेशन: इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने के साथ ही कई नए आधुनिक रेलवे स्टेशनों का निर्माण होगा, जिससे अब तक रेल नेटवर्क से कटे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहली बार ट्रेन पहुंचेगी।

माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स में क्रांति: कोयला, सीमेंट और खाद्यान्न की तेज सप्लाई

नई पटरियों के बिछने और मौजूदा ट्रैकों के दोहरीकरण से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता (Freight Capacity) में भारी इजाफा होगा:

  • सालाना 50-60 मिलियन टन अतिरिक्त ढुलाई: इन नए कॉरिडोर्स से हर साल लाखों टन कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, उर्वरक और खाद्यान्न का परिवहन बिना किसी देरी के हो सकेगा।
  • लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी: सड़क मार्ग की तुलना में रेल परिवहन 70% तक सस्ता और अधिक पर्यावरण-अनुकूल होता है। इन प्रोजेक्ट्स से देश की समग्र लॉजिस्टिक्स लागत को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में घटाने में मदद मिलेगी।
  • पर्यावरण को राहत (Carbon Credit): मालगाड़ियों के सुगम आवागमन से सालाना लाखों लीटर डीजल की बचत होगी और वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में भारी कटौती दर्ज की जाएगी।

‘पीएम गति शक्ति’ नेशनल मास्टर प्लान से जुड़ा खाका

रेल मंत्रालय के अनुसार, इन चारों परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti) के तहत डिजाइन किया गया है।

  • इसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी स्थापित करना है, ताकि रेलवे ट्रैक सीधे औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और प्रमुख वेयरहाउसिंग हब से जुड़ सकें।
  • निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय स्तर पर लाखों मानव-दिवस (Man-days) का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।
  • स्टील, सीमेंट और केबल उद्योग को भारी मांग का सीधा लाभ मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

सरकार ने इन सभी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, ताकि आगामी 3 से 4 वर्षों के भीतर इन ट्रैक्स पर ट्रेनों का सुचारू संचालन शुरू कराया जा सके।

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