डिग्री से ज्यादा स्किल है जरूरी: पीएम नरेंद्र मोदी बोले- तेजी से बदल रहा है ग्लोबल जॉब मार्केट, युवाओं को खुद को ढालना होगा

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वर्तमान समय में देश और दुनिया के भीतर रोजगार के अवसरों, शिक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य को लेकर एक बहुत बड़ी बहस छिड़ी हुई है, जिसके केंद्र में पारंपरिक डिग्रियों और आधुनिक योग्यताओं का अंतर आ गया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से इस महत्वपूर्ण विषय पर खुलकर अपनी बात रखते हुए देश के युवाओं और शिक्षाविदों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है कि अब केवल कागजी डिग्रियों के सहारे जीवन में आगे बढ़ने का दौर पीछे छूट चुका है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में यह कहा है कि जिस तेजी से वैश्विक जॉब मार्केट और टेक्नोलॉजी का परिदृश्य बदल रहा है, उसे देखते हुए पारंपरिक शिक्षा के तरीकों और केवल डिग्री पर निर्भर रहने की आदत में बदलाव लाना अनिवार्य हो गया है। आज के कॉर्पोरेट जगत और उद्योगों को ऐसे युवाओं की तलाश है जिनके पास किताबी ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक जीवन से जुड़ी व्यावहारिक स्किल्स और समस्या समाधान करने की क्षमता हो। प्रधानमंत्री के इस दूरदर्शी बयान ने एक बार फिर से देश की शिक्षा नीति और कौशल विकास (Skill Development) के महत्व को सबसे ऊपर ला खड़ा किया है, जिस पर हर छात्र और अभिभावक को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के इस दौर में तेजी से बदल रहा है रोजगार का स्वरूप

आज की 21वीं सदी का कॉर्पोरेट संसार और औद्योगिक जगत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन और डेटा एनालिटिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के प्रभाव से पूरी तरह से रूपांतरित हो चुका है। जिन कामों को करने के लिए पहले दर्जनों कर्मचारियों की आवश्यकता होती थी, वे अब आधुनिक सॉफ्टवेयर और तकनीकी टूल्स के माध्यम से चुटकियों में हो रहे हैं। ऐसे में यदि कोई युवा केवल अपनी यूनिवर्सिटी की डिग्री या कॉलेज के अंकों के भरोसे यह सोचता है कि उसे मनपसंद नौकरी मिल जाएगी, तो यह उसकी बहुत बड़ी भूल साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी वास्तविकता को रेखांकित करते हुए यह समझाया है कि ग्लोबल जॉब मार्केट की मांग अब पूरी तरह से ‘स्किल-सेंट्रिक’ यानी कौशल-आधारित हो चुकी है। कंपनियों को ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत है जो लगातार नए हुनर सीख सकें, बदलती तकनीक के साथ खुद को तुरंत ढाल सकें और बिना किसी पूर्व अनुभव के भी नई चुनौतियों का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहें।

सीखने के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर कंटीन्यूअस लर्निंग को अपनाना होगा जरूरी

पारंपरिक रूप से हमारे देश में शिक्षा का मतलब स्कूल या कॉलेज जाना, परीक्षाएं पास करना और एक डिग्री हासिल करके नौकरी की तलाश करना माना जाता रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि अब ‘लर्निंग’ यानी सीखने की प्रक्रिया केवल एक निश्चित आयु या कक्षा तक सीमित नहीं रह सकती है। आज के इस गतिशील युग में ‘कंटीन्यूअस लर्निंग’ यानी जीवनपर्यंत नया सीखते रहने की आदत ही किसी भी इंसान को सफलता की सीढ़ियां चढ़ने में मदद कर सकती है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि युवाओं को अपनी शिक्षा के दौरान ही कोडिंग, कम्यूनिकेशन स्किल्स, क्रिटिकल थिंकिंग, टीम वर्क और लीडरशिप जैसी महत्वपूर्ण योग्यताओं को अपने भीतर विकसित करना होगा। जब तक छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के जरिए खुद को इंडस्ट्री के मुताबिक तैयार नहीं करेंगे, तब तक वे आधुनिक श्रम बाजार की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कौशल विकास योजनाओं और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि देश के युवाओं को उनकी पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ हुनरमंद बनाया जाए।

उद्योग जगत और अकादमिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की है सख्त जरूरत

सिर्फ छात्रों को ही नहीं, बल्कि देश के शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भी अपनी पारंपरिक और पुरानी पड़ चुकी शिक्षण प्रणालियों में क्रांतिकारी बदलाव करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर बार-बार जोर दिया है कि शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत (Industries) के बीच एक मजबूत और सीधा सेतु होना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि आज के समय में बाजार की असल मांग क्या है। जब कॉलेज और यूनिवर्सिटीज अपने पाठ्यक्रम में आधुनिक इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से बदलाव करेंगे और छात्रों को प्रैक्टिकल नॉलेज देने पर अधिक ध्यान देंगे, तभी देश से निकलने वाला युवाबल वास्तव में रोजगारपरक बन पाएगा। थ्योरी के साथ-साथ प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग, इनोवेशन लैब्स और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना आज के समय की सबसे बड़ी मांग बन चुका है। सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है ताकि देश के शिक्षण संस्थान केवल डिग्री बांटने वाले केंद्र न बनकर भविष्य के ग्लोबल लीडर्स और इनोवेटर्स तैयार करने की फैक्ट्रियां बन सकें।

आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में स्किल्ड यूथ की भूमिका और भविष्य का रोडमैप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह बयान केवल एक साधारण सलाह नहीं है, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के उस बड़े सपने का एक अहम हिस्सा है जिसमें देश के हर युवा को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया गया है। भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है, और यदि इस विशाल जनसांख्यिकी लाभांश (Demographic Dividend) का सही इस्तेमाल करना है, तो हमें अपनी युवा पीढ़ी को केवल डिग्री धारक बनाने के बजाय हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनाना होगा। जब देश का युवा नौकरी मांगने वाला (Job Seeker) न बनकर नौकरी देने वाला (Job Creator) या एक कुशल पेशेवर बनेगा, तभी देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत स्तंभ के रूप में उभरेगी। प्रधानमंत्री की यह सीख हर छात्र के लिए एक मार्गदर्शिका का काम करती है कि वे अपनी डिग्रियों के साथ-साथ अपनी स्किल्स को लगातार निखारते रहें, क्योंकि यही वह असली पूंजी है जो बदलते दौर में उन्हें कभी असफल नहीं होने देगी और सफलता के नए शिखरों तक पहुंचाएगी।

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