समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के लखनऊ सेक्टर ने राज्य हज समिति की करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन को नियमों को ताक पर रखकर एक निजी बिल्डर को बेचने के गंभीर मामले में आजम खान सहित 5 लोगों के खिलाफ ताजा प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। विजिलेंस की जांच में इस बात की आधिकारिक पुष्टि हुई है कि इस सौदे के चलते राज्य सरकार और हज समिति को करीब ₹2.08 करोड़ के राजस्व का सीधा नुकसान उठाना पड़ा है।
ऐशबाग के कायमखेड़ा में 60 हजार वर्गफीट जमीन का खेल
विजिलेंस में दर्ज विवरण के अनुसार, यह पूरा घोटाला राजधानी लखनऊ के ऐशबाग क्षेत्र स्थित कायमखेड़ा (दुगांवा) की जमीन से जुड़ा हुआ है।
- यहां खसरा संख्या-117 में उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति की लगभग 60 हजार वर्गफीट प्राइम जमीन स्थित थी।
- आरोप है कि तत्कालीन हज समिति अध्यक्ष और जिम्मेदार अफसरों ने अपने पदों का खुला दुरुपयोग किया और सरकारी संपत्ति माने जाने वाली इस जमीन को बिना विधिक प्रक्रियाओं और आवश्यक स्वीकृतियों के एक निजी रियल एस्टेट फर्म को बेच दिया।
- इस अनियमितता की प्राथमिक शिकायत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने 3 मई 2024 को मामले की विस्तृत विजिलेंस जांच के औपचारिक आदेश जारी किए थे।
आजम खान समेत 5 लोगों पर नामजद एफआईआर, किन धाराओं में केस?
उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान लखनऊ के निरीक्षक ध्रुव चन्द्र मौर्य की तहरीर पर लखनऊ सेक्टर थाने में एफआईआर संख्या 0018 दर्ज की गई है। इस मुकदमे में कुल 5 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है:
- मोहम्मद आजम खान – तत्कालीन अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति।
- लईक अहमद – तत्कालीन सचिव, हज समिति (सेवानिवृत्त)।
- डॉ. एमएए खान – तत्कालीन सचिव, हज समिति (सेवानिवृत्त)।
- मोहम्मद अयूब – प्रोपराइटर, ‘आमिश डेवलपर्स’ (निजी फर्म)।
- मुस्तकीम अहमद – सहयोगी/आरोपी।
विजिलेंस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 12, 13(1)(बी) और 13(2) के तहत गंभीर मुकदमा दर्ज किया है।
जांच में राजस्व क्षति की हुई पुष्टि, इंस्पेक्टर संजय सिंह को सौंपी गई विवेचना
विजिलेंस की टीम ने जांच के दौरान रजिस्ट्री कार्यालय के दस्तावेजों, टेंडर प्रक्रियाओं, हज समिति की बैठकों के प्रस्तावों और संबंधित राजस्व अभिलेखों का गहन सत्यापन किया। जांच में स्पष्ट पाया गया कि निजी फर्म को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने की नीयत से नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई थी। केस दर्ज होने के बाद अब इस पूरे प्रकरण की विस्तृत विवेचना विजिलेंस के इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह को सौंप दी गई है। कई अन्य मामलों में पहले से ही कानूनी घेरे में चल रहे आजम खान के लिए यह नई एफआईआर एक और बड़ा झटका साबित हो रही है।
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