अशोक वर्मा
मोतिहारी : ब्रह्माकुमारी संस्था की द्वितीय मुख्य अंतरराष्ट्रीय प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी की 19वीं पुण्य स्मृति दिवस नगर के बनिया पट्टी सेवा केंद्र में श्रद्धा एवं आत्मिक भाव के साथ मनाई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल चार घंटे की विशेष योग भट्ठी से हुई। इसके बाद दैनिक मुरली का श्रवण कराया गया तथा दादी जी के निमित्त भोग स्वीकार कराया गया। उपस्थित सभी भाई-बहनों ने दादी प्रकाशमणि जी के चित्र पर श्रद्धा-पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और दिव्य दृष्टि ली।
इस अवसर पर सेवा केंद्र प्रभारी बीके विभा ने दादी प्रकाशमणि जी के जीवन एवं विशेषताओं पर क्रमवार प्रकाश डालते हुए कहा कि 18 अप्रैल 1969 को ब्रह्मा बाबा के संपूर्णता को प्राप्त कर शरीर छोड़ने के बाद संस्था की बागडोर दादी प्रकाशमणि जी के हाथों में आई। उन्होंने अत्यंत कुशलता, समर्पण और दूरदृष्टि के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई तथा संस्था की सेवाओं का विस्तार विश्व के 120 देशों तक किया।
वरिष्ठ भ्राता बीके अशोक वर्मा ने कहा कि दादी प्रकाशमणि जी ने ब्रह्मा बाबा को पूरी तरह फॉलो किया। उन्होंने अपने जीवन से निरहंकारिता, सेवा और योग में संतुलन का पाठ सिखाया। दादी जी अपने लक्ष्य को कभी नहीं भूलीं और अंत तक आध्यात्मिक पुरुषार्थ में लगी रहीं। 25 अगस्त 2007 को उन्होंने देह का त्याग किया।
कार्यक्रम को इंतजारुल, गौरी शंकर प्रसाद सहित संस्था के कई भाई-बहनों ने संबोधित किया और दादी प्रकाशमणि जी के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर सेवा केंद्र प्रभारी बीके विभा ने उपस्थित अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा ईश्वरीय सौगात भेंट की।
दादी प्रकाशमणि जी का जीवन समर्पण, सेवा, योग, विनम्रता और निरहंकारिता की प्रेरणादायी मिसाल है
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