बिहार की राजनीति में एक बार फिर पूर्ण शराबबंदी का मुद्दा सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। राज्य के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने स्पष्ट शब्दों में यह घोषणा कर दी है कि सरकार अपने इस कानून से पीछे हटने वाली नहीं है। पटना स्थित जेडीयू कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि वर्तमान में लागू शराबबंदी कानून के साथ किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मंत्री के इस तीखे और स्पष्ट रुख के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या एनडीए गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर अंदरखाने कोई बड़ी खींचतान चल रही है।
गठबंधन के भीतर अलग-अलग सुर और सियासी सुगबुगाहट
बिहार में जहां एक तरफ जेडीयू इस कानून को अपनी सबसे बड़ी वैचारिक और सामाजिक उपलब्धि मानती है, वहीं एनडीए के भीतर से ही कई बार इसकी समीक्षा या बदलाव की मांग उठती रही है। विपक्षी दल लगातार इस कानून की विफलता का दावा करते हुए सरकार को घेर रहे हैं। इन सबके बीच मंत्री मदन सहनी का यह बयान सीधे तौर पर उन तमाम कयासों पर विराम लगाने की कोशिश है, जिसमें यह कहा जा रहा था कि सरकार दबाव में आकर नीतिगत बदलाव कर सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य समाज के वंचित तबके, गरीबों और महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार लाना था, और सरकार अपनी इस प्रतिबद्धता पर पूरी तरह कायम है।
शराब तस्करों के साथ अब कंपनियों पर भी कसेगा शिकंजा
मदन सहनी ने केवल पुरानी नीतियों को दोहराया ही नहीं, बल्कि इसे और अधिक आक्रामक बनाते हुए एक नई चेतावनी भी जारी की है। उन्होंने कहा कि विभाग ने कड़े निर्देश दिए हैं कि यदि बिहार की सीमाओं के भीतर किसी भी कंपनी की शराब या अवैध खेप पकड़ी जाती है, तो केवल वाहक या तस्कर ही नहीं बल्कि उस संबंधित मूल कंपनी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी। सरकार अब इस मामले में कानूनी शिकंजे को और ज्यादा व्यापक बनाने जा रही है ताकि अवैध नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचा जा सके। इस कदम को प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा और कड़ा फैसला माना जा रहा है।
महिलाओं और गरीबों के हितों से जुड़ा है यह कानून
अपने बयान के पक्ष में तर्क देते हुए मंत्री ने दस साल पहले लिए गए इस ऐतिहासिक फैसले के सामाजिक फायदों को भी विस्तार से गिनाया। उन्होंने कहा कि इस कानून से सबसे ज्यादा लाभ उन परिवारों को मिला है जहां मेहनतकश लोग अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा नशे में बर्बाद कर देते थे। सरकार का मानना है कि इसके लागू होने से घरेलू हिंसा के मामलों में कमी आई है और बच्चों की शिक्षा तथा परिवार के पोषण पर बेहतर ध्यान दिया जा रहा है। बहरहाल, मंत्री के इस सख्त बयान के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष और सहयोगी दलों की तरफ से इस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
32