नयनाभिराम व आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियो के साथ तीन दिवसीय चंपारण सत्याग्रह महोत्सव का हुआ समापन।

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  • नामचीन कलाकारो के गीत- नृत्य देख भावविभोर हुए दर्शक- श्रोता
  •  चंपारण सत्याग्रह आंदोलन मे जसौलीपट्टी का योगदान अविस्मरणीय: शालिनी
मोतिहारी! कला, संस्कृति विभाग, बिहार व अनुमंडल प्रशासन,सदर के संयुक्त तत्त्वावधान मे बाबू लोमराज सिंह की पावन भूमि जसौलीपट्टी ( कोटवा) मे आयोजित तीन दिवसीय ( दिनांक- 25 -27 मार्च) चंपारण सत्याग्रह महोत्सव का समापन शुक्रवार को भव्यतम सांस्कृतिक समारोह के साथ संपन्न हो गया।
     शालिक सिंह मध्य विद्यालय परिसर मे आयोजित समारोह का विधिवत उद्घाटन केसरिया विधायक शालिनी मिश्रा, कल्याणपुर विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह, उपविकास आयुक्त डाॅ. प्रदीप कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी सदर निशाॅत सिहारा आदि ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर किया।
   समारोह की मुख्य अतिथि  केसरिया विधायक शालिनी मिश्रा ने चंपारण सत्याग्रह आंदोलन मे जसौलीपट्टी व बाबूलोमराज सिंह के महत्ती योगदान को लेकर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने चंपारण सत्याग्रह की भूमि पर आयोजित इस महोत्सव को अगले वर्ष और भव्य स्वरुप देने मे हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। स्थानीय विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह ने इस महोत्सव के प्रारंभिक इतिहास का बखान करते हुए कहा कि इस महोत्सव को सरकार से अपेक्षित सहयोग दिलाकर अगले वर्ष इसे और भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। उपविकास आयुक्त डाॅ. प्रदीप ने चंपारण सत्याग्रह आंदोलन मे जसौलीपट्टी के सेनानियो के योगदान को नमन किया तथा  तेज गति से इस क्षेत्र के विकास पर जोर देने का आश्वासन दिया। सदर एसडीएम निशांत सिहारा ने चंपारण सत्याग्रह महोत्सव मे योगदान देने वाले सभी लोगो के प्रति आभार प्रकट करते हुए सत्याग्रह की इस भूमि को नमन किया। एसडीएम ने कहा कि जसौलीपट्टी के इतिहास को देखते हुए इसके ऐतिहासिक महत्व के अनुरुप इस जगह को विकसित किया जाएगा।
      तत्पश्चात महोत्सव की सफलता मे अप्रतिम योगदान देने वाले महत्वपूर्ण शख्सियतो को उपस्थित अतिथियो द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालो मे कोटवा बीडीओ चिरंजीव पाण्डेय, थानाध्यक्ष करण सिंह, आयोजन समिति के संस्थापक सदस्य विनय कुमार बिन्नू, अभय अनंत और तीनो दिन के महोत्सव का सफलतापूर्वक संचालन करने वाले आदित्य मानस प्रमुख थे।
     इसके बाद जिले के स्थापित व नामचीन कलाकार तथा पटना के कलाकारो द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियो से सांस्कृतिक शाम की शुरुआत हुई। फिर, प्रतिभावान कलाकारो ने लय-स्वर-ताल और स्वर लहरियो एवं नृत्य के माध्यम से उपस्थित दर्शक- श्रोताओ को अपनी कला का भरपूर रसास्वादन कराया।
     सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज नामचीन युवा गायिका सुश्री अदिति झा के सुमधुर गायन से हुआ।अदिति ने गायन की शुरुआत लाजवाब गज़ल ‘ कल चौदवी की चाॅद थी… से की। फिर अपनी सुरीले व सधे स्वर मे भोजपुरी लोकगीत ‘पनिया के जहाज से पलटनिया बनी अइह पीया..’ तथा कोयल बिन बगिया ना सोभे राजा… ‘ गाकर दर्शक- श्रोताओ को झूमने पर विवश कर दिया। इसके बाद जिले की लोकप्रिय गायिका वंदना शुकला ने महोत्सव के ऐतिहासिक महत्व के अनुकूल महात्मा गाॅधी का प्रिय भजन’ रघुपति राघव राजा राम ….’ से अपने गायन की शुरुआत की। वंदना ने अपनी मधुर आवाज मे एक से बढ़कर एक पारंपरिक लोक गीत गाए । उनके द्वारा झूमर ‘ कच्चे अनार बीचे दाना…’  सुनकर पंडाल मे मौजूद खासकर महिला दर्शक आनंद से आह्लादित हो गई। इसके बाद जिले के प्रसिद्ध गायक ई. गिरीश श्रीवास्तव का गायन हुआ। ई. गिरीश ने अपने गायन का आगाज लोकप्रिय भजन ‘ ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन… से किया। फिर उन्होंने भोजपुरी गायन का रुख किया और अपने दमदार सुरो से ‘ जहिया से चल गईली छोड़ के… लोकगीत सुनाया तो पूरा पंडाल तालियो की गड़गड़ाहट से गूॅज उठा। फिर वंदना शुक्ला के साथ ई. गिरीश ने भोजपुरी युगलगीत ‘दिल चुरावे ना आवेला उनका…’ पेश किया, जिसे सुनकर दर्शक भावविभोर हो गए।
     सांस्कृतिक सत्र के अंत मे अक्षत इवेंट इंटरटेनमेंट ग्रुप, पटना की प्रस्तुति हुई। खूबसूरत ग्रामीण वेशभूषा से सजी महिला- पुरुष कलाकारो ने कमला पूजा नृत्य, महात्मा गाॅधी पर आधारित नृत्य नाटिका तथा पारंपरिक लोक कलाओ का आकर्षक,मनोहारी व नयनाभिराम प्रस्तुति देकर इस महोत्सव को नयी ऊंचाइयो तक पहुँचा इसे सार्थक बना डाला।
   मौके पर वरीय संस्कृतिकर्मी संजय कुमार पाण्डेय,कमलेश कुमार सिंह, सुनील सिंह, अखिलेश सिंह, रविन्द्र सिंह, अशोक कुमार सिंह, सुनील दास, रामश्रेष्ठ बैठा, भूपेंद्र ना सिंह,श्याम किशोर सिंह,उपेंद्र कुमार सिंह,धर्मेन्द्र सिंह, दिलीप ठाकुर, हरिशंकर, विजय सिंह आदि गणमान्य लोग मौजूद थे।
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