टीचर्स ऑफ बिहार” की अभिनव पहल: ‘प्रज्ञानिका’ का भव्य प्रकाशन…..

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पटना। बिहार दिवस के पावन अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में “टीचर्स ऑफ बिहार” द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका “प्रज्ञानिका” के द्वितीय खंड के प्रथम अंक का भव्य प्रकाशन किया गया। यह पत्रिका राज्य के शिक्षा जगत में नवाचार, संवाद और रचनात्मकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सशक्त कदम मानी जा रही है।
शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायक पहल…..
“प्रज्ञानिका” केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि बिहार के शिक्षकों, छात्रों और शिक्षा विभाग के बीच संवाद का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। इसमें शिक्षकों के अभिनव प्रयोग, सफलता की कहानियां, छात्रों की प्रतिभा और शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है।
गरिमामय समारोह में हुआ औपचारिक विमोचन……
पटना में आयोजित एक भव्य समारोह में पत्रिका की संपादन टीम द्वारा बिहार शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों को “प्रज्ञानिका” की प्रथम प्रति सादर भेंट की गई।
प्रति भेंट प्राप्त करने वाले प्रमुख अधिकारी:-
विक्रम वीरकर, निदेशक, प्राथमिक शिक्षा
नवीन कुमार, राज्य परियोजना निदेशक
उदय कुमार उज्जवल, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, बीईपीसी
साकेत रंजन, जिला शिक्षा पदाधिकारी पटना
बैद्यनाथ यादव, पूर्व सचिव शिक्षा विभाग
सभी अधिकारियों ने पत्रिका की सराहना करते हुए इसे शिक्षकों के सशक्तिकरण और शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच बताया।
समर्पित संपादन टीम की मेहनत…
“प्रज्ञानिका” की सफलता के पीछे एक समर्पित टीम का योगदान है:
प्रधान संपादक: डॉ. चंदन श्रीवास्तव
सह-संपादक: शुभी श्रीवास्तव एवं डॉ. पूनम कुमारी
पाठ शोधक: डॉ. विनोद कुमार उपाध्याय
तकनीकी सहयोग: ई. शिवेंद्र प्रकाश सुमन
संस्थापक एवं मार्गदर्शक: शिव कुमार
सहयोगी सदस्य:
अनुपमा प्रियदर्शिनी, मृत्युंजयम्, रंजेश कुमार, मधु प्रिया, मृत्युंजय कुमार, केशव कुमार, अजय कुमार मीत, अभिषेक कुमार, पुष्पा प्रसाद।
उद्देश्य और भविष्य की दिशा…
पत्रिका का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहाँ वे अपने अनुभव, नवाचार और विचार साझा कर सकें। इससे शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक बदलाव और गुणवत्ता सुधार की उम्मीद की जा रही है।
संस्थापक एवं टीम का संयुक्त बयान….
“टीचर्स ऑफ बिहार” के फाउंडर शिव कुमार एवं टेक्निकल टीम लीडर ई. शिवेंद्र प्रकाश सुमन ने संयुक्त रूप से कहा:
“प्रज्ञानिका हमारे शिक्षकों की रचनात्मकता और नवाचार का आईना है। यह केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। हमें विश्वास है कि यह मंच आने वाले समय में और अधिक प्रभावशाली बनेगा और राज्य के हर शिक्षक व छात्र को प्रेरित करेगा।”
प्रदेश प्रवक्ता एवं मीडिया संयोजक का बयान…..
प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार एवं प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने संयुक्त रूप से कहा:
“प्रज्ञानिका शिक्षकों की आवाज को मंच देने का एक सशक्त प्रयास है। यह पत्रिका न केवल शिक्षकों के नवाचार को सामने लाती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा भी तय करती है। हम सभी शिक्षकों से अपील करते हैं कि वे इससे जुड़कर अपने अनुभव साझा करें और इस अभियान को और मजबूत बनाएं।”
निष्कर्ष..
“प्रज्ञानिका” का यह अंक न केवल एक प्रकाशन है, बल्कि बिहार के शिक्षा जगत में नई ऊर्जा, नवाचार और संवाद का प्रतीक बन चुका है। यह पहल निश्चित रूप से आने वाले समय में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगी।
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