दिल्ली की CM रेखा गुप्ता का बड़ा धमाका हमें विरासत में मिला है कर्ज का बोझ, जनता की पाई-पाई का हिसाब लेकर रहेंगे

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दिल्ली की नवनियुक्त मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पदभार संभालते ही पिछली सरकार की वित्तीय नीतियों पर सीधा हमला बोला है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि उन्हें दिल्ली का खजाना ‘सरप्लस’ (मुनाफे) में नहीं, बल्कि भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ मिला है। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार आने वाले समय में ‘श्वेत पत्र’ (White Paper) जारी करेगी और पिछले सालों में हुए खर्च की एक-एक पाई का हिसाब सार्वजनिक किया जाएगा।

“कर्ज की विरासत”: मुख्यमंत्री के 3 कड़े प्रहार

खाली खजाना और पेंडिंग बिल: रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने लोक-लुभावन घोषणाओं के चक्कर में दिल्ली के वित्तीय स्वास्थ्य की अनदेखी की। कई विभागों के फंड रुके हुए हैं और विकास कार्यों के बिल पेंडिंग हैं।

भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’: उन्होंने कहा, “दिल्ली की जनता का पैसा किसी की निजी जागीर नहीं है। जहाँ भी गबन या फिजूलखर्ची हुई है, वहां कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हम ऑडिटिंग की एक ऐसी व्यवस्था बनाएंगे जहाँ भ्रष्टाचार की कोई जगह न हो।”

पारदर्शिता का नया मॉडल: सीएम ने घोषणा की कि अब से दिल्ली सरकार के हर बड़े प्रोजेक्ट का डेटा और खर्च का विवरण ऑनलाइन उपलब्ध होगा, ताकि आम आदमी देख सके कि उनका टैक्स कहाँ इस्तेमाल हो रहा है।

विपक्ष का पलटवार: “अपनी नाकामियों को छिपाने की कोशिश”

वहीं, दूसरी ओर आम आदमी पार्टी और विपक्ष ने रेखा गुप्ता के इन दावों को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया है। विपक्ष का कहना है कि दिल्ली हमेशा से एक मुनाफे वाला राज्य रहा है और नई सरकार अपनी संभावित नाकामियों का ठीकरा पिछली सरकार पर फोड़ने के लिए ‘कर्ज’ का बहाना बना रही है।

रेखा गुप्ता का विजन: क्या होगा अगला कदम?

मुख्यमंत्री ने संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार का फोकस अब ‘राजस्व बढ़ाना’ और ‘खर्च घटाना’ होगा।

नई नीतियां: जल्द ही दिल्ली के लिए एक नया ‘फाइनेंशियल ब्लूप्रिंट’ तैयार किया जाएगा।

रुके हुए प्रोजेक्ट्स: जो प्रोजेक्ट्स फंड की कमी से रुके हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।

लोक कल्याण: शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बजट कम नहीं होगा, लेकिन फिजूलखर्ची पर लगाम कसी जाएगी।

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