बिहार में एनीमिया नियंत्रण के लिए ठोस पहल: ‘एफ.सी.एम. थेरेपी’ अभियान का राज्यस्तरीय शुभारंभ

Live News 24x7
4 Min Read
  • ​गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार हेतु स्वास्थ्य विभाग का बड़ा कदम
  • मुजफ्फरपुर में भी विशेष अभियान की शुरुआत
​मुजफ्फरपुर। ​बिहार में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के माननीय स्वास्थ्य मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफ.सी.एम.) इंजेक्शन थेरेपी अभियान का राज्यस्तरीय शुभारंभ किया, जिसे एनीमिया जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक अत्यंत प्रभावी हथियार माना जा रहा है। इसी क्रम में मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल में जिला स्तरीय कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार और जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री रेहान अशरफ ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर अधीक्षक डॉ. ज्ञानेन्दु शेखर, डॉ. प्रेरणा सिंह, राज किरण कुमार (डी.डी.ए.), आशा कार्यकर्ता और पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों सहित स्वास्थ्य विभाग के कई प्रमुख कर्मी उपस्थित रहे।
​एनीमिया की चुनौती और विभाग की रणनीति:
​सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने कार्यक्रम के दौरान नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एन.एफ.एच.एस.-5) के चिंताजनक आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि बिहार में लगभग 63 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, जबकि रूरल एरिया में यह आंकड़ा 63.9 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यह नेशनल एवरेज 52 प्रतिशत से काफी अधिक है, जो राज्य के स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए विभाग ने अभियान के सफल संचालन के लिए विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। इसके तहत चिन्हित एनीमिक गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक लाने और उपचार के पश्चात उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए विशेष एम्बुलेंस सर्विस की व्यवस्था की गई है। साथ ही, इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ट्रेंड मेडिकल ऑफिसर्स और स्टाफ नर्सों की तैनाती की गई है और राज्य स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स की एक विस्तृत सूची भी जारी की गई है।
​उपचार के मानक और सुरक्षा प्रोटोकॉल:
​उपचार की प्रक्रिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अत्यंत स्पष्ट गाइडलाइन्स जारी की हैं। इसके अनुसार, मॉडरेट एनीमिया (Hb 7–9.9 g/dl) की स्थिति में यदि गर्भावस्था 34 सप्ताह से अधिक की है, तो एफ.सी.एम. थेरेपी को प्राइमरी ट्रीटमेंट के रूप में दिया जाएगा। वहीं, 34 सप्ताह से कम की गर्भावस्था में ओरल आयरन के असफल होने पर ही इसका उपयोग किया जाएगा। सीवियर एनीमिया (Hb 5–6.9 g/dl) से पीड़ित 13 से 34 सप्ताह की गर्भवती महिलाओं के लिए आई.वी. आयरन (एफ.सी.एम.) को प्राइमरी ट्रीटमेंट के रूप में अपनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रसव के बाद 42 दिनों तक यदि हीमोग्लोबिन का स्तर कम रहता है, तो डॉक्टर की सलाह पर यह थेरेपी दी जा सकती है।
​सटीक डोज और विशेषज्ञों की निगरानी:
​दवा की सटीक मात्रा सुनिश्चित करने के लिए डोज की गणना ‘गैन्जोनी फॉर्मूला’ (Ganzoni Formula) के आधार पर की जाएगी, ताकि प्रत्येक महिला को उसकी रिक्वायरमेंट के अनुसार सटीक आयरन क्वांटिटी मिल सके। सुरक्षा के लिहाज से इंजेक्शन देने के दौरान और उसके बाद कम से कम 30 मिनट तक पेशेंट की गहन मॉनिटरिंग अनिवार्य की गई है। किसी भी प्रकार की इमरजेंसी स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल में एविल और हाइड्रोकार्टिसोन जैसी लाइफ सेविंग ड्रग्स सदैव अवेलेबल रखने के निर्देश दिए गए हैं। मुजफ्फरपुर में अभियान के पहले दिन कुल 54 चिन्हित बेनेफिशियरी में से 28 महिलाएं वैक्सीनेशन हेतु एलिजिबल पाई गईं, जिन्हें एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल लाकर एफ.सी.एम. थेरेपी प्रदान की गई। यह अभियान “एनीमिया मुक्त बिहार” के लक्ष्य को प्राप्त करने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी माइलस्टोन साबित होगा।
2
Share This Article
Leave a review

Leave a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *