राजधानी लखनऊ में साइबर अपराधियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में जालसाजों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) का खौफनाक खेल खेलते हुए दो सेवानिवृत्त अधिकारियों को अपना शिकार बनाया और उनसे 1 करोड़ 30 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ितों में वित्त विभाग के एक पूर्व अधिकारी और एक सेवानिवृत्त नेवी अफसर के परिजन शामिल हैं। ठगों ने उन्हें हफ्तों तक वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल निगरानी’ में रखा और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनके बैंक खाते खाली कर दिए।
केस 1: वित्त विभाग के रिटायर्ड अफसर से 90 लाख की लूट
एलडीए कॉलोनी (कानपुर रोड) के रहने वाले 73 वर्षीय अमरजीत सिंह, जो वित्त विभाग से सेवानिवृत्त हैं, को ठगों ने पूरे 25 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा।
साजिश: ठगों ने खुद को मुंबई साइबर सेल का अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का वारंट जारी हुआ है।
खौफ का खेल: उन्हें डराने के लिए व्हाट्सएप पर फर्जी कोर्ट वारंट भेजा गया और 24 घंटे कैमरा ऑन रखने को मजबूर किया गया। डर के मारे उन्होंने अपनी एफडी (FD) तोड़कर और सेविंग्स से कुल 90 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।
भंडाफोड़: जब बेंगलुरु में कार्यरत उनके बेटे ने पिता के व्यवहार में बदलाव देखा और पूछताछ की, तब जाकर इस महाठगी का खुलासा हुआ।
केस 2: 100 वर्षीय बुजुर्ग और नेवी अफसर बेटे से 40 लाख की ठगी
सरोजनीनगर इलाके में रहने वाले 100 साल के बुजुर्ग हरदेव सिंह और उनके 70 वर्षीय बेटे, जो मर्चेंट नेवी से रिटायर्ड हैं, को भी इसी तरह निशाना बनाया गया।
तरीका: जालसाजों ने खुद को सीबीआई (CBI) अधिकारी बताकर फोन किया और कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल ‘आतंकी फंडिंग’ में हुआ है।
नतीजा: पिता-पुत्र को 7 दिनों तक घर में ही कैद रहने पर मजबूर किया गया। इस दौरान उनसे करीब 40 लाख रुपये ‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर ऐंठ लिए गए। कुल मिलाकर दोनों मामलों को मिलाकर यह आंकड़ा 1.30 करोड़ के पार पहुंच गया है।
साइबर पुलिस की कार्रवाई और चेतावनी
लखनऊ साइबर क्राइम सेल के इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव के मुताबिक, ठगों ने पैसे ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड के बैंक खातों में ट्रांसफर किए हैं।
रिकवरी: पुलिस ने अब तक करीब 15 लाख रुपये फ्रीज (Freeze) कराने में सफलता पाई है, लेकिन बाकी रकम की तलाश जारी है।
सावधानी ही बचाव: पुलिस ने साफ किया है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती और न ही पैसे की मांग करती है।
डिजिटल अरेस्ट से बचने के 5 गोल्डन रूल्स:
डरे नहीं: अनजान नंबर से आने वाली ‘पुलिस या सीबीआई’ की कॉल पर भरोसा न करें।
कैमरा ऑन न करें: कोई भी अधिकारी आपको स्काइप या व्हाट्सएप पर कैमरा ऑन रखने को नहीं कह सकता।
ट्रांसफर न करें: जांच के नाम पर कभी भी किसी निजी खाते में पैसे न भेजें।
परिजनों को बताएं: अगर ऐसी कॉल आए, तो तुरंत अपने परिवार या दोस्तों से बात करें।
1930 पर कॉल करें: ठगी का एहसास होते ही तुरंत नेशनल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
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