बिहार की सियासत में भावुक पल चिराग ने छुए चाचा पशुपति पारस के पैर खगड़िया में टूटा दूरियों का बर्फ

Live News 24x7
4 Min Read

बिहार की राजनीति में मंगलवार, 24 मार्च 2026 का दिन एक ऐतिहासिक और भावुक मिलन का गवाह बना। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने खगड़िया में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अपने चाचा पशुपति कुमार पारस के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। रामविलास पासवान के निधन के बाद जिस परिवार और पार्टी में दो फाड़ हो गए थे, वहां वर्षों बाद दिखी इस ‘अपनत्व की झलक’ ने बिहार के सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। क्या यह केवल एक शिष्टाचार था या फिर ‘चाचा-भतीजे’ के बीच मची वर्चस्व की जंग अब खत्म होने की ओर है?

1. खगड़िया का वो मंच: जहाँ झुक गए ‘हनुमान’

खगड़िया के अलौली में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम में जब दोनों नेता एक साथ मंच पर पहुँचे, तो चिराग पासवान ने बिना किसी झिझक के आगे बढ़कर पशुपति पारस के पैर छुए।

चाचा की प्रतिक्रिया: पशुपति पारस ने भी मुस्कुराते हुए भतीजे के सिर पर हाथ रखा और उन्हें जीत का आशीर्वाद दिया।

समर्थकों का जोश: मंच पर इस दृश्य को देखते ही ‘पासवान अमर रहे’ के नारे लगने लगे और दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं की आंखों में चमक दिखाई दी।

2. रामविलास की विरासत: क्या होगा विलय?

स्वर्गीय रामविलास पासवान के निधन के बाद पशुपति पारस ने पार्टी (LJP) तोड़कर अलग गुट बना लिया था, जिसके बाद चिराग ने उन्हें ‘गद्दार’ तक कहा था। लेकिन हाल के दिनों में बदले समीकरणों ने दोनों को करीब ला दिया है।

NDA का दबाव: सूत्रों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि पासवान परिवार एकजुट रहे ताकि दलित वोट बैंक (पासवान वोट) में कोई बिखराव न हो।

शक्ति प्रदर्शन: चिराग पासवान वर्तमान में एनडीए के एक मजबूत स्तंभ हैं, जबकि पशुपति पारस का राजनीतिक भविष्य फिलहाल हाशिये पर दिख रहा है। ऐसे में यह ‘झुकाव’ पारस गुट के लिए संजीवनी साबित हो सकता है।

3. “खून के रिश्ते कभी खत्म नहीं होते”: चिराग पासवान

मंच से उतरने के बाद जब मीडिया ने चिराग से इस मिलन पर सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा, “राजनीति अपनी जगह है, लेकिन संस्कार और परिवार अपनी जगह। चाचा मेरे पिता समान हैं और बड़ों का आशीर्वाद लेना हमारी संस्कृति है। इसमें राजनीति नहीं देखी जानी चाहिए।” वहीं पशुपति पारस ने भी चिराग की तारीफ करते हुए उन्हें ‘भविष्य का नेता’ बताया।

4. सियासी मायने: विरोधियों की बढ़ी धड़कनें

अगर चिराग और पशुपति पारस के बीच सुलह होती है और दोनों पार्टियां (LJP-R और RLJP) फिर से एक हो जाती हैं, तो:

वोट बैंक: बिहार में 6% पासवान वोटों पर इस गुट का एकतरफा कब्जा हो जाएगा।

RJD को नुकसान: तेजस्वी यादव जो पासवान वोटों में सेंधमारी की कोशिश कर रहे थे, उन्हें बड़ा झटका लग सकता है।

चिराग का कद: परिवार को जोड़ने के बाद चिराग पासवान का कद एनडीए और बिहार की राजनीति में और भी बड़ा हो जाएगा।

1
Share This Article
Leave a review

Leave a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *