मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सराहा सीतामढ़ी का मॉडल: ‘कालाजार उन्मूलन’ की सफलता अब बनेगी ‘फाइलेरिया मुक्ति’ का आधार

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  • कार्यपालक निदेशक ने कॉफी टेबल बुक प्रति भी मांगी
  • 2025 में जिले में सिर्फ 4 कालाजार के मरीज
सीतामढ़ी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान सीतामढ़ी जिले की स्वास्थ्य उपलब्धियों का बारीकी से जायजा लिया। चंदौली, बेलसंड में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जिले द्वारा कालाजार उन्मूलन की दिशा में किए गए नवाचारों और अथक प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीतामढ़ी ने जिस तरह से कालाजार पर विजय प्राप्त की है, वह न केवल जिले के लिए गौरव की बात है, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक अनुकरणीय मॉडल भी है।
​सफलता की गाथा कहती कॉफी टेबल बुक:
​मुख्यमंत्री के दौरे का मुख्य आकर्षण जिला भीबीडी कार्यालय द्वारा तैयार की गई कॉफी टेबल बुक “कालाजार उन्मूलन: एक सफर, नवाचार एवं सर्वोत्तम प्रथाएं” रही। मुख्यमंत्री ने इस पुस्तक के पन्नों में दर्ज जिले की संघर्ष यात्रा को देखा और समझा कि कैसे एक समय की बड़ी चुनौती रही इस बीमारी को अब खात्मे की कगार पर लाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडे ने भी इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए इसकी प्रति की मांग की। उन्होंने कहा कि सफलताओं को इस प्रकार लिपिबद्ध करना भविष्य के स्वास्थ्य अभियानों के लिए मार्गदर्शक का काम करेगा।
​नवाचार और जनभागीदारी से मिली बड़ी जीत:
​सीतामढ़ी की इस सफलता के पीछे केवल दवाएं ही नहीं, बल्कि सोच में बदलाव और अनूठे प्रयोग शामिल रहे हैं। जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ. रविन्द्र कुमार यादव ने मुख्यमंत्री को बताया कि किस तरह जिले ने तकनीक और समाज को एक साथ जोड़ा। जहाँ एक ओर प्रभावी छिड़काव के लिए मशीनों को विशेष रूप से री-डिजाइन किया गया, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में बच्चों को जागरूक करने के लिए ‘सांप-सीढ़ी’ जैसे खेलों का सहारा लिया गया। सबसे महत्वपूर्ण कदम धार्मिक स्थलों और धर्मगुरुओं का सहयोग रहा, जिससे समाज के हर वर्ग तक छिड़काव और बचाव का संदेश पहुँचा।
​आंकड़ों में दर्ज हुई ऐतिहासिक उपलब्धि:
​विगत आठ वर्षों का रिकॉर्ड जिले की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। वर्ष 2018 में जहाँ कालाजार के 154 मामले सामने आए थे, वहीं निरंतर प्रयासों और कड़ी निगरानी के कारण यह संख्या वर्ष 2025 तक घटकर मात्र 04 रह गई है। यह गिरावट दर्शाती है कि जिला आठ वर्षों से लगातार उन्मूलन की स्थिति को बनाए रखने में सफल रहा है। मरीजों का नियमित फॉलो-अप और प्रभावित परिवारों को मच्छरदानी व कंबल जैसी आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराकर प्रशासन ने सुरक्षा का एक मजबूत चक्र तैयार किया है।
कालाजार की सफलता अब फाइलेरिया उन्मूलन का बनेगी आधार:
​मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर न केवल पुरानी सफलताओं को सराहा, बल्कि भविष्य के लक्ष्य भी निर्धारित किए। उन्होंने फाइलेरिया मरीजों के बीच एमएमडीपी किट वितरित करते हुए इस बीमारी के खिलाफ भी निर्णायक जंग का आह्वान किया। डॉ. रविन्द्र कुमार यादव ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि “कालाजार उन्मूलन हमारी सफलता है, और अब फाइलेरिया उन्मूलन हमारा संकल्प है।” अब जिले का लक्ष्य कालाजार के दौरान सीखे गए अनुभवों और बेस्ट प्रैक्टिसेज को फाइलेरिया अभियान में लागू करना है ताकि जिले को पूरी तरह व्याधि मुक्त बनाया जा सके।
​प्रेरणा का स्रोत बनेगी यह यात्रा:
​डॉ. नीला रमन यादव द्वारा प्रायोजित यह कॉफी टेबल बुक भविष्य की पीढ़ी के लिए एक धरोहर साबित होगी। इस पूरे अभियान में जीविका दीदी, आंगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता, पंचायत प्रतिनिधियों और शिक्षकों का सामूहिक योगदान रहा है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जनसहयोग से ही इतनी बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों को मात दी जा सकती है। यह यात्रा केवल आंकड़ों की कमी की नहीं, बल्कि सीतामढ़ी के सामूहिक आत्मविश्वास और स्वास्थ्य विभाग की कर्मठता की कहानी है।
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