सिंदूर की शौर्यगाथा” का विमोचन मगध पुस्तक मेला के सांस्कृतिक मंच से किया गया
गया। मगध पुस्तक मेला सह सांस्कृतिक महोत्सव का आज का दिन पूर्णतः युवाओं को समर्पित रहा, जिसका केंद्रीय थीम “प्रेरणा से प्रगति” था। इस अवसर पर ज्ञान, नवाचार, कला, साहित्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का सजीव संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित जनसमूह को प्रेरणा और ऊर्जा से भर दिया है।
दिन की शुरुआत मगध मेधा कंपटीशन के अंतर्गत आयोजित विद्यालय स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी एवं महाविद्यालय स्तरीय नृत्य प्रतियोगिता से हुई। महाविद्यालय स्तर की नृत्य प्रतियोगिता में विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए 50 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी सशक्त, सृजनात्मक और ऊर्जावान प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया है। प्रतिभागियों की भाव-भंगिमा, ताल-लय और विषयगत प्रस्तुति ने निर्णायक मंडल को भी गहराई से प्रभावित किया है।
वहीं विद्यालय स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में लगभग 20 समूहों ने सहभागिता करते हुए अपने वैज्ञानिक नवाचार, प्रयोगात्मक मॉडल और सामाजिक उपयोगिता से जुड़े विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया ह। छात्रों द्वारा प्रस्तुत प्रदर्शनी को पुस्तक मेला में आए दर्शकों एवं पुस्तक प्रेमियों ने न केवल सराहा, बल्कि बच्चों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार क्षमता की मुक्तकंठ से प्रशंसा भी की है।
इन प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका में जे.के. मालवीय,निशा लाज सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए अपने प्रेरक व्यक्तित्व और मार्गदर्शक शब्दों से बच्चों का उत्साहवर्धन किया है।
मध्यान सत्र में किलकारी के बच्चों द्वारा “शिक्षा है अधिकार हमारा” विषय पर प्रस्तुत नाटक ने सभी को गहराई से प्रभावित किया है। इस नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों ने शिक्षा के महत्व और संवैधानिक अधिकार को सशक्त अभिनय के साथ प्रस्तुत करते हुए दर्शकों को विषय पर गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित किया है।
युवाओं को समर्पित इस विशेष दिवस के अंतर्गत एक और प्रेरक क्षण तब देखने को मिला, जब “परीक्षा पर चर्चा” कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री से भेंट करने वाले बिहार के एकमात्र छात्र, गया जिले के विराज कुमार, का सांस्कृतिक मंच पर सम्मान किया गया है। विराज कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और अनुशासन से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि किसी भी क्षेत्र में कार्य करते हुए प्रयास करना कभी न छोड़ें।
पुस्तक मेला परिसर में विशेष चित्रकला कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जिसमें 100 से अधिक बच्चों ने सहभागिता कर चित्रकला के विविध आयामों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया है। इस कार्यशाला का सफल संयोजन सारंग आर्ट एंड म्यूजिक की निर्देशिका निशा लाज द्वारा किया गया है।
इसके अतिरिक्त तामीर फाउंडेशन के बच्चों का पुस्तक मेला परिसर में परिभ्रमण कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें 100 से अधिक बच्चों ने पुस्तकों का अवलोकन किया, पुस्तकें खरीदीं तथा रंगारंग सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बना दिया है। आयोजन समिति की ओर से सभी प्रतिभागियों एवं बच्चों को उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास और उत्साह का संचार हुआ है।
संध्या सत्र में लेखिका खुशबू कुमारी द्वारा लिखित पुस्तक “सिंदूर की शौर्यगाथा” का विमोचन मगध पुस्तक मेला के सांस्कृतिक मंच से किया गया है। इस गरिमामय अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर-पूर्व क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह मोहन सिंह , क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख राणा प्रताप , दक्षिण बिहार प्रांत के प्रांत प्रचारक उमेश रंजन , प्रांत सेवा प्रमुख अंजनी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे हैं।
पुस्तक विमोचन के पश्चात इंदल कुमार एवं टीम द्वारा आयोजित युवा साहित्यकार कवि सम्मेलन में मगही, हिंदी एवं उर्दू के कवियों ने सहभागिता करते हुए अपनी कविताओं और रचनाओं का पाठ किया है। इस कवि सम्मेलन में मिथिलेश सिंह ने भी अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर किया। इस अवसर पर आयोजन समिति के समन्वयक श्री विवेक कुमार द्वारा सभी कवियों एवं साहित्यकारों को अंग वस्त्र एवं पौधा प्रदान कर सम्मानित किया गया है।
रात्रि सत्र में प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित सतीश शर्मा जी की विशेष प्रस्तुति आयोजित की जाएगी, जिसमें शास्त्रीय संगीत की विभिन्न विधाओं की भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ होंगी। आयोजन समिति की ओर से सभी कलाकारों को पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण एवं सांस्कृतिक सम्मान का प्रतीक है। मंगलवार को आज के कार्यक्रमों के सफल संचालन में युवा सहयोगियों आशीष, आस्था, शिखा, मेघा, ओमी, आदर्श सहित अनेक स्वयंसेवकों का उल्लेखनीय योगदान रहा, जिनके समर्पण और सक्रिय सहभागिता से पूरा आयोजन सुव्यवस्थित एवं सफल रहा है।
कल का दिवस बच्चों को समर्पित रहेगा जिसका थीम होगा बच्चे मन के सच्चे।
इसके अतिरिक्त कल मगध मेल कंपटीशन अंतर्गत विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में रंगोली और महाविद्यालय स्तरीय एक्टेंपोर, भाषण का आयोजन किया जाएगा।
इंटेक चैप्टर गया कि ओर से गया जी की विरासत: कल, आज और कल विषय अंतर्गत विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा।
कल अपराह्न सत्र में हिंदी भाषा पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा जिसकी अध्यक्षता दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के विभाग अध्यक्ष द्वारा की जाएगी।
मगध पुस्तक मेला में शास्त्रीय संगीत की सुरमयी संध्या, पंडित सतीश शर्मा की विशेष प्रस्तुति ने श्रोताओं को किया भावविभोर
मगध पुस्तक मेला सह सांस्कृतिक महोत्सव के अंतर्गत सांस्कृतिक मंच पर आज शास्त्रीय संगीत की एक अनुपम और यादगार संध्या का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर देश के प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित सतीश शर्मा जी ने शास्त्रीय गायन की विशेष प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से साक्षात्कार कराया है।पंडित सतीश शर्मा जी ने अपने सधे हुए आलाप, भावपूर्ण बंदिशों और रागों की सूक्ष्म प्रस्तुति के माध्यम से शास्त्रीय संगीत की गहराई और आत्मिक अनुभूति को जीवंत कर दिया। उनकी प्रस्तुति में रागों की शुद्धता, लय की परिपक्वता और भावों की अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रत्येक रचना पर श्रोताओं की ओर से तालियों की गड़गड़ाहट और सराहना यह दर्शा रही थी कि शास्त्रीय संगीत आज भी समाज में अपनी गहरी पकड़ बनाए हुए है।
इस अवसर पर आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने पंडित सतीश शर्मा का अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न के रूप पौधा भेंट कर सम्मान किया और उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रस्तुतियाँ युवा पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय संगीत से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।
इस कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति ने सभी कलाकारों, संगीत प्रेमियों एवं उपस्थित दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मगध पुस्तक मेला सह सांस्कृतिक महोत्सव ज्ञान, साहित्य और कला के संगम का एक जीवंत मंच बनकर निरंतर सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ कर रहा है।
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